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गौरा देवी को भारत रत्न देने की मांग

Wed, 05 Jun 2013 05:30 AM IST
Dehradun
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ऋषिकेश। चिपको मूवमेंट मेमोरियल फाउंडेशन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर चिपको आंदोलन को राष्ट्रीय वन और पर्यावरण रक्षा आंदोलन का दर्जा देने की मांग की है। साथ ही आंदोलन की प्रणेता स्व. गौरा देवी को भारत रत्न और इस दौरान जेल गए आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों की भांति पुरस्कृत करने की भी मांग की है।
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प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में फाउंडेशन के संयोजक रामराज बडोनी ने बताया कि वर्तमान में हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक वनों का विस्तार चिपको आंदोलन की देन है। अस्सी के दशक से पूर्व वनों के कटान की वजह से उत्तराखंड सहित पूरे देश में जंगलों को भारी क्षति हुई थी। तब पहली बार 26 मार्च 1974 को चमोली जनपद की साधारण ग्रामीण महिला गौरा देवी ने ग्रामीण महिलाओं को साथ लेकर चिपको आंदोलन शुरू किया था। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इंडियन फारेस्ट एक्ट 1927 की जगह वन अधिनियम 1980 लागू करने को बाध्य होना पड़ा था। बताया कि आंदोलनकारियाें को आज तक राज्य अथवा कें द्र सरकार द्वारा सम्मान करना तो दूर पूछा तक नहीं गया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाए हैं एसपी सिंह
डोईवाला। पर्यावरण संरक्षण को गति देने वालों में एक नाम बालावाला निवासी एसपी सिंह का भी है, जो प्रति वर्ष हजारों पौधों को रोपने और वितरित करने का अभियान पिछले तीन सालों से चलाए हुए हैं। वर्ष 2010 से पर्यावरण संरक्षण को सिंह संकल्पित भाव से काम कर रहे हैं। प्रति वर्ष 10 हजार पौधे रोपने के लिए उन्हाेंने छात्र-छात्राओं को जोड़ने का काम किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों में रुचि को देखते हुए उन्हें पौधों का वितरण भी करते है। पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी आमदनी का एक हिस्सा उन्होंने सुरक्षित रखा हुआ है। पिता को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले सिंह पिता सरदार गुरचरण सिंह की पुण्यतिथि 22 जून से इस अभियान को शुरू करते हैं, जो तीन माह तक चलाया जाता है। बकौल एसपी सिंह पर्यावरण संरक्षण के लिए अभी और प्रयास करने होंगे। हमारा अभियान आने वाले सालों में रंग लाएगा।
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