ऋषिकेश। गंगा में मछलियों का शिकार प्रतिबंधित है, मगर सब कागजों में, धरातल पर नहीं। आस्थापथ के समीप गंगातट पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में मछलियों का शिकार किया जा रहा है, मगर स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सिंचाई विभाग लापरवाह बना हुआ है।
मायाकुंड क्षेत्र और व्यस्ततम त्रिवेणीघाट, बहत्तर सीढ़ी घाट के आसपास मछलियों का शिकार करने वाले लोग खासे सक्रिय हैं। सूत्रों का दावा है कि ऐसे लोग क्षेत्र में दिनभर सक्रिय रहते हैं, मगर इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। कभी-कभार सिंचाई विभाग, पुलिस-प्रशासन के नुमाइंदे आस्थापथ पर आते भी हैं तो यहां व्याप्त अव्यवस्था पर गौर करना मुनासिब नहीं समझते। इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
शुक्रवार को क्षेत्र के जागरूक युवाओं कैलास रयाल, नरेंद्र सिंह कैंतुरा, जगमोहन सिंह चौहान, शंभू सिंह चौहान ने आस्थापथ पर भ्रमण के दौरान मछली का शिकार कर रहे पांच-छह लोगों को ऐसा करने से टोका तो वह मौके से भाग निकले। बताया कि नदी में कंटिया डालकर मछलियों को पकड़ा जा रहा था। उनका कहना है कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन को प्रतिबंधित क्षेत्र में खुलेआम शिकार करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतनी चाहिए। उन्होंने मामले में प्रशासन की अनदेखी पर भी सवाल उठाए।
क्या कहते हैं अफसर
गंगा में मछलियाें का शिकार पूर्ण प्रतिबंधित है। यह संज्ञान में नहीं है कि ऐसा कहां हो रहा है। इस पर प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका को कार्रवाई करनी चाहिए।
- सुधीर मोहन, एसडीओ, सिंचाई विभाग
यह मामला संज्ञान में नहीं था, गंगा में मछलियों का शिकार करने वालों के खिलाफ प्रशासन जल्द संयुक्त टीम बनाकर छापेमारी करेगा। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- रामजी शरण शर्मा, उपजिलाधिकारी