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‘हिंदुस्तानी इस्लाम की खुशबू ही सबसे अलग’

Mon, 21 Jan 2013 05:31 AM IST
Dehradun
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तस्मिया एकेडमी में आयोजित संगोष्ठी में बोले राज्यसभा सांसद तरुण विजय
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देहरादून। हिंदुस्तान के इस्लाम में वो खुशबू है जो नफरत को मोहब्बत में बदल देती है। तस्मिया एकेडमी में आयोजित संगोष्ठी में राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने इस्लाम को मानवतावादी धर्म बताते हुए अमन का संदेश दिया।
रविवार को सीरत उन नबी कमेटी की ‘पैगंबर मोहम्मद साहब का मानवता के लिए संदेश’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में डा. एस फारुख ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने दास प्रथा, लड़कियों की हत्या, दहेश प्रथा, स्त्रियों पर अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई। गढ़वाल विवि के कुलपति डा. एसके सिंह ने धर्म और विज्ञान को एक दूसरे का पूरक बताया। ईसाई धर्मगुरु फादर जेपी सिंह ने इस्लाम को सभी धर्मों का सहयोगी करार दिया। सिख समुदाय से आए एसडीएस मान ने इस मौके पर कहा कि इंसान कर्मों से पहचाना जाता है।
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संगोष्ठी के अंत में सैय्यद फारुख अहमद ने नात (इस्लामिक कविता) पढ़कर सुनाई। इस अवसर पर मुफ्ती वसीउल्लाह, मौलाना अब्दुल कादिर, अंबर खरबंदा, आरके बख्शी, मौलाना आरए हक्कानी आदि मौजूद रहे।
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मोहम्मद साहब का अंतिम संदेश
शहर मुफ्ती सलीम अहमद ने 1423 साल पहले अराफात के मैदान में मोहम्मद साहब द्वारा अंतिम हज के दौरान दिया गया खुतबा (बयान) पढ़कर सुनाया। इसमें इंसानियत और अमन को मुकम्मल तरीके से पिरोया गया है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ के ह्यूमन चार्टर में भी मोहम्मद साहब के बयान को शामिल किया गया है। बयान का लब्बोलुआब यह है कि इस्लाम कहीं से भी हिंसा को बढ़ावा नहीं देता है।
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