देहरादून। पूरे नौ महीने पहले प्रदेश के परिवहन मंत्री ने शायद यह सोचकर आरटीओ में छापा मारा था कि यहां से दलाली जैसा ‘लाइलाज रोग’ हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। उसके बाद से आज तक जिस रफ्तार से यहां दलालों की संख्या बढ़ी है, इसे देखकर मंत्री के उस अभियान का कुछ दूसरे ही मायने निकलकर आ रहे हैं। रविवार को छुट्टी के दिन जब आरटीओ कार्यालय खुला तो वहां पर सबसे पहले पहुंचने वालों में कई जाने पहचाने आर ढेर सारे चेहरे दिखे। जिनकी दखल बाहर से लेकर कार्यालय के अंदर तक दिखी। इसी बीच जरूरतमंद पहुंचे तो उन्हें गेट पर ही रोककर सौदे बाजी शुरू कर दी गई। किसी ने जल्दी काम कराने की बात की तो रेट भी उसी तरह से बढ़कर बताया गया। एक बानगी देखी जा सकती है।
केस-1
जरूरत मंद-पहले तो कम पैसे में काम हो जाता था। अब पहले के मुकाबले दो गुने पैसे क्यो।
दलाल- भाई जी ऊपर से ही पैसे बढ़े हैं। जब से मंत्री ने छापा मारा है, सभी काम के रेट डबल हो गए हैं।
केस-2
कार्यालय में सक्रिय एक दलाल अंदर आया और बोला साहब सिर्फ साइन कर दो बाकी मुहर और दूसरा काम मैं खुद पूरा कर लूगा। पार्टी थोड़ा जल्दी में। पूरा एडवांस दे रखा है।
दलालों के निक नेम
पगड़ी वाले, मान जी, मोटे पेट वाले, विकासनगर वाले
फाइल पर रहता है दलाल का कोड
आरटीओ में सभी दलालों के अलग-अलग कोड हैं। फाइल पर काम शुरू होते ही कोड दर्ज कर लिया जाता है। काम निपटने पर दलाल खर्चा आगे पहुंचा देते हैं।
असिस्टेंट लेते हैं भुगतान
आरटीओ में काम करने वाले सक्रिय बाबू और अधिकारियों नेअपने नीचे निजी एजेंट रखे हैं। जो दलालों से फाइलों के भुगतान का लेनदेन करते हैं। ये सब काम कार्यालय में पर्दे के पीछे होता है।
11 अप्रैल को कार्यालय में छापा मारने के बाद मंत्री ने तत्कालीन आरटीओ सुनीता सिंह और एआरटीओ प्रशासन दिनेश पटोई को मुख्यालय से अटैच कर दिया था। जबकि कुछ दिन बाद ही दिनेश पटोई को ऋषिकेश में तैनाती दे दी गई। जबकि सुनीता सिंह को उत्तर प्रदेश के लिए रिलीव कर दिया गया।
नहीं मिले चार बाबुआें के पैसे
मंत्री के छापे में ड्यूटी पर तैनात चार बाबुआें के पास मिला कैश सीज कर दिया गया था। जांच के बाद चारों को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन अब तक किसी को भी उसकी रकम वापस नहीं मिली है।
बोली जनता
ऑटो चालक हृदयेश कुमार शर्मा का कहना है कि आरटीओ में दो सौ ज्यादा दलाल सक्रिय है। दलाल का कोड फाइल पर डले बगैर काम नहीं होता। मनमीत सिंह कहते हैं कि आरटीओ में बिना एजेंट के काम कराना आसान नहीं है। राजीव गुरुंग का कहना है कि दलालों को फाइल देने से चक्कर नहीं लगाने पड़ते। अवनीश नेगी ने भी कार्यालय में दलालों का दबदबा बताया।
किस काम का कितना खर्च (रुपये में)
काम निर्धारित फीस दलाल लेते हैं
फिटनेस 300 900
लाइसेंस (सामान्य) 400 1200
लाइसेंस (कॉमर्शियल) 300 3500
वाहन पंजीकरण 300 800-2500
परमिट (ऑटो) 850 2500
कोट--
कार्यालय में लगातार दलाली रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। अगर कोई भी व्यक्ति काउंटर रूम के अंदर आकर काम कराता है तो यह उस कक्ष अधिकारी की चूक। इस पर शख्ती बरती जाएगी।-सुधांशु गर्ग संभागीय परिवहन अधिकारी