देहरादून। पॉवर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड (पिटकुल) में उप महाप्रबंधक (डीजीएम) आईटी की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा रहा है। आरोप है कि गलत अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर इस पद पर नियुक्ति दे दी गई। पिटकुल प्रबंधन ने मामले की जांच के आदेश तो दिए, लेकिन हैरत यह है कि जांच उसी अधिकारी को सौंप दी गई, जिस पर गलत नियुक्ति देने का आरोप है।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से यह तथ्य सामने आया है कि पिटकुल में डीजीएम आईटी की तैनात गलत साक्ष्यों के आधार पर की गई है। पिटकुल ने इस पद के लिए 15 साल का अनुभव मांगा था, लेकिन 13 साल 10 माह छह दिन के अनुभव वाले आवेदक को तैनाती दे दी गई। भाजपा विधायक तीरथ सिंह रावत ने प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से की। इस पर संज्ञान लेते हुए सीएम ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक से जांच आख्या तलब की। लेकिन प्रबंध निदेशक ने जांच निदेशक मानव संसाधन को ही सौंप दी है। बता दें कि निदेशक मानव संसाधन पर भी गलत नियुक्ति देने का आरोप लगाया गया है।
तकनीकी पहलू की जांच निदेशक मानव संसाधन ही कर सकते हैं। मेरे पास कोई और अधिकारी नहीं है, जिससे जांच कराई जा सके।
-एके गुप्ता, प्रबंध निदेशक पिटकुल
साफ है कि मामले में लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में दोषियों पर दोष आखिर कैसे सिद्ध होगा। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
-तीरथ सिंह रावत, विधायक
महत्वपूर्ण बिंदु
-नवंबर 2011 में विज्ञप्ति प्रकाशित की गई थी
-कुल 32 आवेदन आए थे
-23 आवेदन अनुभव और शैक्षणिक योग्यता न होने पर निरस्त किए गए
-नौ आवेदकों का किया गया था साक्षात्कार
-31 मार्च 2012 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था