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भारत मां की रक्षा को बार बार जन्म लेना चाहते हैं जांबाज

Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
Dehradun
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देहरादून। 1971 के भारत पाक के युद्ध में उत्तराखंड के 250 से अधिक जवानों ने शिरकत की थी। इसमें से कुछ अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद भी हो गए थे। जो जिंदा हैं उनकी वीरता की कहानी रविवार को एक बार फिर से लोगों ने दुहराई। महावीर चक्र से सम्मानित सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल आनंद स्वरूप और मेजर जनरल शमशेर सिंह आज भी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध को याद करके रोमांचित हो जाते हैं। वीर चक्र से पुरस्कृत कैप्टन कैलाश नाथ जैडू, कर्नल रन बहादुर गुरुंग, सेना मेडल से नवाजे गए हवलदार बगीचा सिंह, आनरेरी कप्तान विक्रम सिंह के जेहन में आज भी 1971 का युद्ध तरोताजा है। सेना मेडल से सम्मानित कर्नल कल्पनाथ राय, केजे ठाकुर, नौ सेना मेडल से पुरस्कृत देवी प्रसाद और लेफ्टिनेंट जनरल ओम प्रकाश कौशिक को रविवार विजय दिवस के अवसर पर सम्मानित कर प्रदेश सरकार भी गौरवान्वित हुई। इन वीरों का कहना है कि देश की रक्षा के लिए अगर फिर से जन्म लेना पड़े तो वह उसके लिए भी तैयार है।
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शहीद के परिजनों को भी मिला सम्मान
शहीद मेजर आके अरोड़ा के भाई डीडी अरोड़ा, एमटीएस चौधरी की माता रविंद्र कौर, एयर फोर्स के रविंद्र नैथानी की पत्नी उमा नैथानी, धीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रभा देवी, सूबेदार राजेंद्र बंगारी की पत्नी शाकंबरी देवी, शूर सिंह राणा की पत्नी पुष्पा देवी शामिल रही।
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