मसूरी। एवरेस्ट विजेता तूलिका रानी ने पर्वतारोहण अभियानों की वजह से एवरेस्ट पर भारी मात्रा में कचरा जमा हो जाने पर चिंता जताई। इसे पर्यावरणीय संकट करार दिया। स्क्वाड्रन लीडर तूलिका मंगलवार को पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित एक गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत करने एमपीजी कालेज पहुंची थीं। यहां उन्होंने स्लाइड शो के जरिए अपने पर्वतारोहण अभियान के बारे में जानकारी दी।
हिमालय में पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ने को भविष्य के लिए खतरा करार दिया। छात्राओं से पर्यावरण बचाने के लिए गंभीरता से कार्य करने का आग्रह किया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल और पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी संयोजक डा. शालिनी गुप्ता, लिपिका काम्बोज के अलावा डा. श्रीराम गुप्ता, डा. एलएम उपाध्याय, प्रो. अनिल खंडूरी, डा. इमरान खान, नेहा भाटिया, शिप्रा शाह, मनीषा आदि मौजूद रहे।
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अब चीन की ओर से करनी है एवरेस्ट पर चढ़ाई
मसूरी। एवरेस्ट विजेता तूलिका रानी का सपना अब वर्जिन पीक्स (जिन चोटियों पर अभी कोई नहीं पहुंचा) को फतह करना है। वह इसके लिए ट्रेनिंग भी ले रही हैं। अमर उजाला से बात-चीत में तूलिका ने भविष्य की योजना का खुलासा किया। बताया कि अगली बार वह नार्थ रूट से यानी चीन की ओर से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करेंगी।
एयर फोर्स शार्ट सर्विस कमीशन में बतौर स्क्वाड्रन लीडर तूलिका ने बीते साल भी माउंट एवरेस्ट फतह करने की कोशिश की थी, लेकिन सेहत के साथ न दे पाने की वजह से वह अभियान बीच में रह गया था। इस बार 26 मई को आखिर उसने एवरेस्ट की चोटी तिरंगा फहराया। पर्वतारोहण की ट्रेनिंग आर्मी के सियाचिन ग्लेशियर स्थित संस्थान से प्राप्त करने वाली तूलिका के मुताबिक वह माउंट स्टॉक कांगडी, मांउट भागीरथी, माउंट कामेट, मांउट सेसर कांगडी को फतह कर चुकी हैं। सियाचीन ग्लेशियर मेेेें विंटर कैंप में भी हिस्सा लिया। निजी स्रोतों से एवरेस्ट तक पहुंचने में खर्च 21 लाख रुपये के लिए उसने यूपी सरकार से भी सहायता मिलने की बात दोहराई।