देहरादून। फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाकर नौकरी हासिल करने के मामले में आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) के पूर्व ट्रांसपोर्टेशन अधिकारी संजय कुमार निगम को न्यायालय ने दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, उसे जमानत भी दे दी गई।
कानपुर निवासी संजय कुमार निगम पुत्र रामप्रसाद निगम फरवरी 1986 में ओएनजीसी देहरादून में बतौर ट्रांसपोर्टेशन अधिकारी नियुक्त हुआ। उसे यह तैनाती बतौर अनुसूचित जाति अभ्यर्थी दी गई थी। इसके लिए निगम ने वर्ष 1978 में तहसीलदार सदर कानपुर का बना प्रमाणपत्र पेश किया था। प्रमाणपत्र पर शक के आधार पर ओएनजीसी अधिकारियों ने जांच की, तो इसके फर्जी होने की पुष्टि हुई। सीबीआई से भी मामले की जांच कराने के बाद अगस्त 2009 में निगम की सेवा समाप्त कर दी गई। ओएनजीसी की ओर से निगम के खिलाफ मुकदमा कराया गया।
बृहस्पतिवार को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रीतू शर्मा ने निगम को दोषी मानते हुए दो वर्ष साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास वहन करना होगा। हालांकि, बृहस्पतिवार को ही संजय को जमानत भी दे दी गई।