हरियाणा के सोनीपत में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। शराब तस्करी के आरोपी ने परिजनों संग मिलकर अपना फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार करा लिया और न्यायालय में चल रहे मामलों में खुद को मृत घोषित करा लिया। उसके बाद आरोपी नगर निगम में निजी कंपनी के वाहन पर चालक की नौकरी करता रहा।
मामला सामने आने के बाद से जिम्मेदार अफसर खुद को बचाने के प्रयास में जुट गए हैं। एएसपी की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद आरोपी व उसके परिजनों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
उत्तराखंड में एक्साइज एक्ट के दो मामले थे दर्ज
शहर के विकास नगर के रहने दिल्ली अग्निशमन विभाग में कार्यरत भंवर सिंह ने डीसी को शिकायत देकर बताया कि उसके संज्ञान में आया कि प्रेम नगर का संजय कागजों में मृत है। वह मूलरूप से गांव नकलोई का रहने वाला है। उस पर उत्तराखंड में एक्साइज एक्ट के दो, गैंगस्टर एक्ट का एक, धोखाधड़ी का एक और मोटर व्हीकल एक्ट के मामले वर्ष 2007 व 2008 में दर्ज हुए थे। उन मामलों में आरोपी जमानत कराकर गायब हो गया था। उसके खिलाफ जुलाई 2012 में गैर जमानती वारंट जारी किया। यह वारंट सदर थाने में पहुंचा। इसके जवाब में जिले के अधिकारियों ने आरोपी संजय को मृत घोषित किए जाने की रिपोर्ट भेज दी। भंवर सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपी ने व्यवस्था के लचीलेपन का दुरुपयोग किया और नगर परिषद (अब नगर निगम) से अपना मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया। एएसपी की जांच में आरोपी के जीवित होने और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर न्यायालय में पेश करने की पुष्टि हो गई। इसके बाद सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
भाई ने दी थी मौत की जानकारी
आरोप है कि न्यायालयों की कार्रवाई से बचाने के लिए संजय के भाई नरेंद्र कुमार ने नगर परिषद (अब नगर निगम) व सामान्य अस्पताल में अपने भाई संजय की 28 जुलाई, 2009 में मौत होने की सूचना दे दी। उसने नप से 18 जनवरी, 2011 को अपने भाई संजय का मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया। उसे उत्तराखंड कोर्ट में जमा करा दिया। उसके चलते न्यायालय के मामले बंद कर दिए गए। मामले की शिकायत के बाद अधिकारियों ने एएसपी मुख्यालय उपासना सिंह से इसकी जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर खुद को मृत दिखाने वाले संजय, उसकी पत्नी रितु, संजय के भाई नरेंद्र और नरेंद्र की पत्नी माया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले में आरोपी फरार है।
नगर निगम में ठेका कंपनी में करता रहा नौकरी
आरोपी संजय नगर निगम में ठेका कंपनी में चालक की नौकरी कर रहा था। उसने अपना वोटर कार्ड दूसरे पते पर बनवा लिया। भंवर सिंह ने उत्तराखंड न्यायालय से सत्यापित प्रति लाकर नगर आयुक्त, डीसी और एसपी को सौंपी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद सीएम विंडो पर शिकायत की गई। तब एसपी ने एएसपी उपासना को जांच सौंपी। उनकी जांच में सामने आया कि न्यायालय की कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया।
आरोपी संजय, उसके भाई नरेंद्र, भाभी माया व पत्नी रितू देवी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के आधार पर फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने में जिनका नाम सामने आएगा, उनकी भूमिका का पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी। - इंस्पेक्टर सुखबीर सिंह, थाना प्रभारी सिटी सोनीपत
मामला संज्ञान में आने पर मृत्यु प्रमाणपत्र को निरस्त करा दिया है। इस मामले की सूचना हमारी तरफ से ही पुलिस को दी गई है। - मुकेश सरोहा, सब रजिस्ट्रार, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र