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WTC FINAL: पंत, पुजारा और रहाणे को ना बनाएं बलि का बकरा

सार

अगर जीत का सेहरा कप्तान और कोच के सिर पर होता है तो हार की जिम्मदारी भी इनके माथे होना चाहिए। बेवजह में दूसरे खिलाड़ियों को बलि का बकरा ना बनाया जाना चाहिए।
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भारतीय टीम - फोटो : social media
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विस्तार
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टीम इंडिया को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप हारे हुए घंटे भी नहीं हुए थे कि टीम के भीतर और बाहर, विलेन ढूंढने का प्रयास तेज हो गया। जैसा कि आम-तौर पर होता है, कसूरवार उसी को ठहराया जाता है जो सबसे कमजोर कड़ी हो, सबसे विनम्र हो या फिर कोई युवा। साउथम्पटन में हार के बाद भी टीम इंडिया की नाकामी का ठीकरा उन खिलाड़ियों पर फोड़ने की कोशिश हो रही है जो पूरी तरह से हार के जिम्मेदार नहीं है।

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सबसे पहले बात ऋषभ पंत की। दूसरी पारी में बल्लेबाज पंत की शैली की आलोचना करके उन्हें गुनाहगार साबित करना शायद सबसे आसान तरीका है। लेकिन, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि पंत ने टेस्ट की दूसरी पारी में सबसे ज्यादा रन बनाए थे और जब तक वो क्रीज पर टिके थे, कीवी टीम भी दहशत में थी। देखिए, पंत के खेल को लेकर सिलेक्टिव होना भी उचित नहीं है। पूर्व टेस्ट ओपनर वीरेंद्र सहवाग की तरह उन्हें भी अगर ये लाइसेंस मिला है को वो अपने स्वभाव के मुताबिक हमेशा आक्रामक रुख अपनाए रखें तो टीम मैनेजमेंट को उन्हें बैक करना चाहिए। 

नतीजों की परवाह किए बगैर। महज 21 मैचों के टेस्ट करियर में किस विकेटकीपर बल्लेबाज ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शतक लगाया है और अपने दम पर ऑस्ट्रेलिया में एक टेस्ट सीरीज जितायी है? सैय्यद किरमानी से लेकर एम एस धोनी तक भी इस युवा पर नाज करेंगे। ये बात सही है कि बेपरवाह और लापरवाह होने में फर्क है जैसा कि सुनील गावस्कर कह रहें हैं पंत को आड़े हाथों लेने के लिए, लेकिन ये बात बल्ले और गेंद के बीच जब मुकाबला होता तो हर पल ऐसा होता है।

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चेतेश्वर पुजारा - फोटो : social media
पंत के बाद निशाने पर हैं चेतेश्वर पुजारा। कप्तान कोहली ने हमेशा की तरह एक बार फिर से पुजारा का नाम लिए बगैर हर किसी को जतला दिया कि उन्हें इस नई दीवार से परेशानी है। कोहली का ये कहना कि सेट बल्लेबाजों को रन बनाने के प्रयास करना चाहिए ये बयां करने के लिए काफी है कि कप्तान पुजारा की शैली से खुश नहीं थे। लेकिन, कोहली को ज्यादा दूर नहीं बल्कि केन विलियमसन की तरफ नजर दौड़ाने की जरुरत है, जिन्होंने पुजारा-वाली-शैली में ही दोनों पारियों में बेशकीमती रन बनाए। बिना स्ट्राइक रेट की परवाह किए। अनिल कुंबले ने पुजारा का बचाव करते हुए एक बार कहा था कि टेस्ट मैच में स्ट्राइक रेट की बात बेमानी है। लेकिन, हर हार के बाद इस शानदार खिलाड़ी को सवालों के घेरे में लाना उनके अनुभव का सम्मान नहीं करने जैसा है।
 

कोहली रहाणे - फोटो : twitter
पुजारा के बाद एक और आसान शिकार हैं अंजिक्य रहाणे। कोहली की ही तरह रहाणे ने भी पहली पारी में एक शानदार पारी खेली लेकिन दूसरी पारी में वो नाकाम हुए तो उन्हें बलि का आसान बकरा बनाया जाने लगा। सवाल उनकी तकनीक और टैम्प्रामैंट से लेकर इंग्लैंड में उनके रिकॉर्ड को लेकर बहस शुरु करा दी गई है। लेकिन, टीम के उप-कप्तान जिसने कुछ ही महीने पहले ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत दिलवायी, उस पर अचानक इतना दबाव बनाना सही है?
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भारत बनाम न्यूजीलैंड - फोटो : social media
ऐसा नहीं है कि ये तीनों खिलाड़ी हार के लिए जिम्मेदार नहीं थे और इनकी आलोचना नहीं होनी चाहिए। लेकिन, अगर कटघरे में किसी को खड़ा करना है तो न्याय-संगत तरीके से करें। आखिर, रोहित शर्मा को क्यों छोड़ दिया गया जो ओपनर के तौर पर विदेश में एक बार फिर से नाकाम रहे? कप्तान कोहली को क्यों छोड़ दिया गया, जो सबसे अहम लम्हें में एक बार फिर फेल हुए? कोच रवि शास्त्री को क्यों छोड़ दिया जाए, जिन्होंने एक दिन का मौका मिलने के बावजूद प्लेइंग इलेवन में बदलाव नहीं किया और दो स्पिनर खिलाने की जिद पर अड़े रहे जबकि मौसम और पिच के मुताबिक एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज या एक बल्लेबाज को खिलाना ज्यादा बेहतर रहता? और ऐसा मैच के नतीजे के बाद नहीं कहा जा रहा है। इंग्लैंड के दो शानदार पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन और नासिर हुसैन लगातार कामेंट्री के दौरान टीम इंडिया के इस गेम प्लान पर अचंभित महसूस कर रहे थे। कुल मिलाकर देखा जाए तो अगर जीत का सेहरा कप्तान और कोच के सिर पर होता है तो हार की जिम्मदारी भी इनके माथे होना चाहिए। बेवजह में दूसरे खिलाड़ियों को बलि का बकरा ना बनाया जाना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 
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