कूचबिहार ट्रॉफी के फाइनल में नाबाद 404 रन बनाने वाले प्रखर चतुर्वेदी अचानक से सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने विजय जोल के 451 रन के बाद टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे बड़ी पारी खेली है और युवराज सिंह के 358 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा है। सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने यह पारी टूर्नामेंट के फाइनल मैच में खेली है। उनकी इस पारी के चलते कर्नाटक ने मुंबई के 380 रन के जवाब में आठ विकेट पर 890 रन बनाए और पहली पारी में बढ़त के आधार पर मैच जीत लिया।
चतुर्वेदी ने फाइनल मैच में पारी की शुरुआत की और अंत तक नाबाद रहे। उन्होंने 638 गेंदों का सामना किया। इसमें 46 चौके लगाए और तीन छक्के भी जड़े। इस पारी के बाद उन्हें सीधे कर्नाटक की रणजी टीम में जगह मिल सकती है। हालांकि, अब तक का सफर उनके लिए इतना भी आसान नहीं रहा है।
बेंगलुरू में रहने वाले प्रखर चतुर्वेदी के पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनकी मां डीआरडीओ में वैज्ञानिक हैं। ऐसे में उनके ऊपर पढ़ाई में भी अच्छा करने का दबाव था। इस वजह से वह पढ़ाई पर भी उतना ही ध्यान देते हैं, जिनता कि क्रिकेट पर। हालांकि, उनके कोच का मानना है कि यह चीज उनके पक्ष में काम करती है। उनके कोच का कहना है कि वह पर लड़के के माता-पिता से कहते हैं कि क्रिकेट के साथ पढ़ाई भी जारी रखें। पूरे दिन प्रैक्टिस करने का फायदा मिलता है, लेकिन जो लड़के सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान लगाते हैं। उनके ऊपर लगातार अच्छा करने का बहुत दबाव होता है।
ऐसे में अगर दो पारियों में रन नहीं बनते या दो टूर्नामेंट खराब हो जाते हैं या फिर अंडर-19 टीम में चयन नहीं होता तो लड़के तनाव झेल नहीं पाते और बिखर जाते हैं। प्रखर के मामले में ऐसा नहीं हुआ। देश की अंडर-19 टीम में उनका चयन नहीं हुआ, लेकिन वह पहले की तरह अभ्यास करते रहे। वह कुछ पारियों में फेल हुए, लेकिन इसका असर उन पर नहीं पड़ा और अब उन्होंने उस मैच में सबसे बड़ी पारी खेली है, जो सबसे अहम था।
वैज्ञानिक मां और इंजीनियर पिता के कारण प्रखर के लिए पढ़ाई करना जरूरी था, लेकिन क्रिकेट खेलना जरूरी नहीं था। हालांकि, यह खेल के प्रति उनका जुनून ही था, जो वह रोज अपने घर से 80 किलोमीटर दूर अभ्यास के लिए आते थे। रोज 160 किलोमीटर चलने के बावजूद वह क्रिकेट के प्रति पूरे जी जान से लगे हुए थे। ऐसे में उनके कोच को कहने पर माता-पिता ने घर में थ्रोडाउन की व्यवस्था कर दी। इससे उनका आने-जाने का समय बचने लगा। वह घर पर अभ्यास करते हैं और छु्ट्टी होने पर एकेडमी आते हैं और यहीं रुककर अभ्यास करते हैं।
2017 में एकेडमी में अपना अभ्यास शुरू करने वाले प्रखर मानसिक रूप से बेहद मजबूत हैं। अंडर-16 और अंडर-19 टीम में चयन नहीं होने के बावजूद उन्होंने जो समझदारी दिखाई। उससे पता चलता है कि वह कितने परिपक्व हैं। उनके कोच ने कहा कि 404 रन की पारी के बाद उनके अंदर यह आत्मविश्वास होगा कि वह इस स्तर पर खेलने के हकदार हैं। उन्होंने आगे बताया कि प्रखर अपना कमाल दिखा चुके हैं, लेकिन अभी ध्रुव प्रभाकर, आदित्य समर्थ, समित द्रविड़, युवराज अरोड़ा जैसे अन्य खिलाड़ी हैं, जो आने वाले समय में कमाल कर सकते हैं। इनके इतर भी एकेडमी में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं।