नमस्कार, मैं सुशील दोशी एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं। विश्व कप का फाइनल अनुमान के बिल्कुल उलट रहा। भारत को इस टूर्नामेंट का विजेता माना जा रहा था। पिछले 10 मैच में लगातार भारत जीता था, लेकिन जैसे ही फाइनल में पहुंचा तो ऑस्ट्रेलिया जो कि यहां अक्सर पहुंचती रही है। उसके खिलाफ भारत को हार झेलनी पड़ी। ऑस्ट्रेलिया छठी बार खिताब जीतने की कोशिश कर रहा था।
टूर्नामेंट के पहले चरण में वो काफी लड़खड़ा रहा था और लग रहा था की उसका जितना नामुमकिन सा है लेकिन क्रिकेट का खेल ऐसा ही है। इसमें इतने उलटफेर हो जाते हैं कि आप आश्चर्यचकित रह जाते हैं और जो भारतीय टीम दूसरी टीमों को बहुत ही आसानी के साथ हरा रही थी, जिस भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को पहले मैच में ही हरा दिया था और सभी टीमों को पराजित किया था। वह अब उसी ऑस्ट्रेलिया से फाइनल में पराजित हो गया और 1983 और 2011 के बाद विश्व चैंपियन बनने का जो सपना था वो सपना एक तरह से अधूरा रह गया तो भारत को फिर से कोशिश करनी पड़ेगी।
आप भी सोचते होंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत को पराजय हाथ लगी तो उसका मुख्य कारण यही था कि आप लगातार अच्छा खेल रहे हैं। कोई एक दिन तो ऐसा आना ही था। जिस दिन आप उतना अच्छा नहीं खेल पाएंगे, जितना कि आप अक्सर खेल रहे होते हैं। क्रिकेट की यही तो अनिश्चितता है और दूसरी टीम ऑस्ट्रेलिया के बारे में कहना पड़ेगा कि क्योंकि वो अक्सर फाइनल खेला करते हैं, अक्सर फाइनल जीता करते हैं तो इस बात का उनको विश्वास था कि वह एक बार फिर से अगर फाइनल में पहुंचे तो वह इस जगह के हकदार हैं। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन किया और भारतीयों को खेल के हर विभाग में एक तरह से पराजित किया और उनके जो बल्लेबाज हैं हेड, उन्होंने तो जो बैटिंग की उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। हेड ने पहले भी भारत को परेशान रखा था। इस बार भी उन्होंने बहुत परेशान किया और भारत को आखिरकार पर पराजित कर दिया। शानदार शतक लगाया और दूसरी बात यह है कि टॉस का भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा। टॉस ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ने जीता कमिंस ने और उन्होंने पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। उनको मालूम था कि बाद में ओस पड़ने वाली हैं और ओस पड़ते ही स्पिनर्स भूमिका से बाहर हो जाएंगे। स्पिनर्स कोई विकेट ले नहीं पाएंगे और वही हुआ कि जैसे ही ओश पड़ी रात को तो बल्लेबाजी आसान हो गई।
जब ऑस्ट्रेलिया ने बल्लेबाजी की तो शुरुआत में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन जब ओस पड़ गई उसके बाद भारतीय स्पिनर्स कुछ भी नहीं कर पाए और आराम से ऑस्ट्रेलिया ने छह विकेट से जबरदस्त जीत हासिल की। तो कुल मिलाकर ये थोड़ा ऐंटी क्लाइमैक्स की तरह हो गया। लग रहा था कि भारतीय विश्व कप जरूर जीतेगा जो शारीरिक भाषा दिख रही थी और दूसरी बात यह भी हुई कि पहले इतने एकतरफा तरीके से भारत ने मुकाबले जीते थे कि मध्यक्रम को तो बल्लेबाजी का मौका ही नहीं मिलता था।
तब मैं ये सोचता भी था की कभी शुरुआत के बल्लेबाज उतने सफल नहीं हुए और शुरुआत के बल्लेबाज अगर जल्दी आउट हो गए। विराट कोहली ने अगर शतक नहीं लगाया और रोहित शर्मा अगर अर्धशतक नहीं लगा पाए और भारत के तीन चार विकेट जल्दी गिर गए तब बाकी के बल्लेबाजों को मौका तो मिला नहीं पूरे टूर्नामेंट में क्योंकि भारत आसानी से जीता रहा तब भारतीय बल्लेबाजी का क्या होगा?
तो जो और विश्व प्रसिद्ध बल्लेबाजी लाइन अप भारत का था ना, वो लड़खड़ा गया। ऐसा ही हुआ इस बार असफल हुए शुरू के तीन चार बल्लेबाज अब जितनी उनकी प्रतिभा थी और जितनी उनसे अपेक्षा थी उतने रन नहीं बने और तीसरी बात ये भी कि भारतीय ओवर कॉन्फिडेन्स दिखे। बल्लेबाजों को लगता था की हम बहुत ज्यादा रन बना लेंगे, बड़े बड़े स्ट्रोक्स खेल लेंगे और लगातार सफल भी हो जाएंगे। लेकिन कई बार क्या होता है कि जब आप जोखिम उठाते हैं ना तो अपना विकेट भी खतरे में डाल देते हैं? रोहित शर्मा ने यही किया।
शुभमन गिल तो बहुत ही एक सरल सी गेंद पर पुल करते हुए आउट हो गए। टाइमिंग गलत हो गई। जो पिच थी वो धीमी थी, गेंद टप्पा खाकर धीमी गति से आ रही थी और ऑस्ट्रेलिया ने एक योजना के साथ इस मैच में पदार्पण किया। उन्होंने शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंद रखी और उसी में मिक्स अप करते रहे। यानी कभी गति का परिवर्तन करते रहे। धीमी गेंद शॉर्ट ऑफ लेंथ भी करते रहे। कभी क्रॉस सीम से गेंद की और अपवर्ड सीम का भी प्रयोग किया तो अलग अलग इस तरह से प्रयोग करते रहे।
भारतीय बल्लेबाज हमेशा टाइम इन के लिए संघर्ष करते हुए दिखाई दिए, लेकिन फिर भी भारत को इतना निराश भी नहीं होना चाहिए। देखिये ये बात जरूर है कि जीतने के हम बहुत नजदीक पहुंच गए थे, वहां से हारे, लेकिन यह बात भी सही है कि हमने हर टीम को पराजित किया। विश्व की हर टीम को हमने इस टूर्नामेंट में पराजित किया। हमने ऑस्ट्रेलिया को पराजित किया, न्यूीलैंड को पराजित किया, पाकिस्तान को पराजित किया। और जितनी भी बड़ी बड़ी टीम है, दक्षिण अफ्रीका को पराजित किया, श्रीलंका को पराजित किया, अफगानिस्तान को पराजित किया तो इस तरह से कोई हमारा प्रदर्शन बुरा नहीं रहा। एक मैच खराब खेला और वो भी दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से फाइनल मैच ही हमने खराब खेला और वहीं हम पराजित हो गए। उप विजेता के पद के साथ ही हमें संतोष करना पड़ा। लेकिन कुल मिलाकर यह टूर्नामेंट बहुत ही गजब का रहा और लोगों को क्रिकेट का बड़ा रोमांच आया और एक ऐसे क्रिकेट की दावत मिली जिसकी लोगों ने कल्पना की थी।
तो भारत में ये मैचे हुए थे, भारतीय दर्शकों को बड़ा मजा आया, आपको भी आनंद आया होगा और इसी के साथ हम इस पॉडकास्ट का समापन करते हैं। आपने अब तक मुझे सुना, मुझे सुनाने में बड़ी खुशी हुई और मुझे आशा है की आपको ये तमाम जो मैंने बातें की वो सुनने में पसंद आयी होंगी। आपका बहुत बहुत धन्यवाद। शुक्रिया नमस्कार।