नमस्कार! मैं सुशील दोशी आप सभी का स्वागत करता हूं। विश्व कप के मैच गरमा रहे हैं और भारत-न्यूजीलैंड का मुकाबला जिस तरह से समाप्त हुआ, उसने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों को पूरी तरह से खुश कर दिया। देखिए भारतीय क्रिकेट टीम और न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम दोनों अपने चार-चार मैच जीत चुकी थी और कहा जा रहा था कि न्यूजीलैंड से ये मुकाबला बड़ा ही कठिन होगा क्योंकि न्यूजीलैंड का तेज आक्रमण दुनिया भर के बल्लेबाजों के मन में दहशत फैला रहा था, लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम को भारतीय पिचों पर हराना बहुत ही मुश्किल काम है। यह असंभव तो नहीं, लेकिन बहुत मुश्किल जरूर है।
भारतीयों ने एक बार फिर से दिखा दिया कि क्यों भारत का बल्लेबाजी क्रम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी क्रम में से एक माना जाता है, खासतौर पर भारतीय पिचों पर। मैं तो कहूंगा कि भारत ने जो चार विकेट से जीत हासिल की, उस विराट कोहली ने एक बार फिर से दिखा दिया कि सीमित ओवर क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा योद्धा कोई है तो वह विराट कोहली हैं। कितने ही मैच उन्होंने अकेले अपनी बल्लेबाजी के दम पर जिताए हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि परिस्थितियां विपरीत होती हैं न तो विराट ज्यादा बेहतर निखर कर सामने आते हैं। टीम को अपना हाथ खड़ा कर कहता है 'कोई हो न हो, लेकिन मैं हूं न'। दूसरी बात मैं कहना चाहूंगा कि मोहम्मद शमी ने जिस तरह की गेंदबाजी की, मुझे समझ नहीं आया कि शार्दुल ठाकुर को इतने दिनों से क्यों खिलाया जा रहा था। शमी जैसा विश्वस्तरीय गेंदबाज जब आपके पास है, जिसके पास विकेट लेने की महारत हासिल है, जो मैदान पर आते ही विकेट लेता है, उस गेंदबाज को खिलाया नहीं गया और उनकी जगह शार्दुल को खिलाया गया।
मैं समझता हूं कि इस बार जब शमी को खिलाया गया तो उन्होंने साबित कर दिया कि वो कितने उपयोगी हैं भारत के लिए। उन्होंने पांच विकेट लेकर भारत की जीत की राह खोल दी। अन्यथा लग रहा था कि न्यूजीलैंड धर्मशाला में 300 रन बना लेगा और इतने रन चेज भारत के लिए बहुत मुश्किल होता। हालांकि, शमी ने वहां से विजय के द्वार भारत के लिए खोले, जिसका रहा सहा काम विराट कोहली ने कर दिया।
कप्तान रोहित शर्मा की बात न करूं तो वो भी ठीक नहीं होगा। रोहित ने टॉस जीतने के बाद जो पहले बल्लेबाजी करने का फैसला नहीं किया और न्यूजीलैंड को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया, यह एक मास्टरस्ट्रोक था। तमाम जानकार कह रहे थे कि रोहित को पहले बल्लेबाजी चुननी चाहिए थी, लेकिन आखिरकार रोहित शर्मा ही सही साबित हुए। शुरू में जो मुश्किलें आ रही थीं और तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी, वो फायदा बाद में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों को नहीं मिला।
शायद यह रोहित को पता भी था कि बाद में ओस गिरने वाली है और ओस गिरने से क्या होता है कि गेंद स्किड करती है और स्पिनर्स को हाथ में पकड़ नहीं मिलती। ऐसे में स्पिनर्स को भी मदद नहीं मिलती। गेंद स्पिन नहीं होती और टप्पा खाने के बाद तेज गति से बल्ले पर आती है। ये तमाम फायदे भारतीय टीम को मिले। कुल मिलाकर भारतीय टीम का जो सिलसिला जारी है विश्व कप जीतने का वो बेहद प्रभावशाली है। मैं फिर से कहूंगा कि भारत को भारतीय पिचों पर भारतीय परिस्थितियों में और भारतीय दर्शकों के सामने हराना बहुत मुश्किल काम है। भारत विजयरथ पर सवार हो गया है।