उस दौरान सिमरन दिल बहादुर की उम्र 16 साल की थी। दिल्ली में लड़कों के साथ क्रिकेट खेल सिमरन उन्हीं के जैसी क्रिकेटर बन चुकी थी। उसके साथियों और चचेरे भाई को लगा कि जब यह लड़कों को टक्कर दे रही है तो लड़कियों के साथ क्या करेगी? फिर क्या था इन लड़कों ने सिमरन के लिए अकादमी की तलाश शुरू की जो इशांत शर्मा के कोच शरवण कुमार के रूप में पूरी हुई। शरवण भी सिमरन की प्रतिभा पहचान गए और उन्होंने उसे अकादमी में लड़कों के साथ खिलाना जारी रखा। यहीं सिमरन की जिंदगी ने पलटा खाया। उनके कुक (खाना बनाने वाले) पिता दिल बहादुर अचानक बीमार हो गए, उन्हें नौकरी छोड़कर दिल्ली आना पड़ा। घर की सारी जिम्मेदारी बड़ी बहन नेहा और सिमरन पर आ पड़ी। नेहा के साथ सिमरन ने भी क्रिकेट छोड़ नौकरी कर ली।