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IND vs ENG: 'यह सही नहीं है', टेस्ट में शुभमन के नए रोल से खुश नहीं हैं उनके पिता, ओपनिंग को लेकर कही यह बात

Fri, 08 Mar 2024 04:22 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला

सार

विशाखापत्तनम टेस्ट की दूसरी पारी में शुभमन ने 104 रन बनाकर अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया था। यह टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शुभमन की पहली और सबसे बड़ी पारी थी।
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शुभमन गिल के शतक पर पिता का रिएक्शन - फोटो : BCCI
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विस्तार
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शुभमन गिल के पहले कोच और पिता लखविंदर का मानना है कि टेस्ट में गेंदबाजों के खिलाफ आगे बढ़कर या यूं कहें चढ़कर खेलने से उनके बेटे को काफी फायदा मिला है और वह फिर से रन बनाने लगे हैं। हालांकि, लखविंदर शुभमन के तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आने के फैसले से सहमत नहीं हैं। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के पहले मैच में फेल होने के बाद शुभमन पर दबाव बढ़ रहा था। वह टेस्ट में 12 पारियों से अर्धशतक नहीं लगा पाए थे। 
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हालांकि, विशाखापत्तनम टेस्ट की दूसरी पारी में शुभमन ने 104 रन बनाकर अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया था। यह टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शुभमन की पहली और सबसे बड़ी पारी थी। उन्होंने पिछले साल वेस्टइंडीज दौरे पर खुद को तीसरे नंबर पर भेजने की वकालत की थी। उसके बाद रोहित और यशस्वी टेस्ट में रेगुलर ओपनर बन गए थे। शुभमन ने धर्मशाला टेस्ट में 12 चौके और पांच छक्के की मदद से 110 रन की पारी खेली। यह उनके टेस्ट करियर का चौथा शतक रहा।

शुभमन और उनके पिता - फोटो : BCCI
उस शतक के बाद से शुभमन लगातार फॉर्म में दिखे हैं। राजकोट में तीसरे टेस्ट के दौरान शुभमन ने दूसरी पारी में मैच जिताऊ 91 रन बनाए थे। इसके बाद रांची टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 38 रन और दूसरी पारी में मैच जिताऊ नाबाद 52 रन बनाए थे। अब धर्मशाला टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने पिता लखविंदर की मौजूदगी में शानदार शतक जड़ा। पिता ने खड़े होकर उनके लिए ताली बजाई। शुभमन को शुक्रवार को स्लॉग स्वीप के साथ सीरीज का दूसरा शतक पूरा करते हुए देखने वाले उनके पिता ने उन कारणों के बारे में बात की जिससे भारतीय बल्लेबाज को रेड बॉल के क्रिकेट में अपने खराब फॉर्म से उबरने में मदद मिली।

शुभमन गिल और रोहित शर्मा - फोटो : BCCI
लखविंदर ने कहा- गेंद को बाहर निकलकर खेलने से एक बड़ा अंतर आया है। उन्होंने बीच में ऐसा करना बंद कर दिया था और इससे दबाव बन गया था। अंडर-16 के दिनों से ही वह स्पिनरों और तेज गेंदबाजों पर गेंद को मूव होने से रोकने या फिर उसे काटने के लिए आगे बढ़कर खेलते रहे हैं। जब आप अपना नैसर्गिक खेल नहीं खेलते हो तो आप मुश्किल में पड़ जाते हो। पूरा खेल आत्मविश्वास के बारे में है। जब आप एक अच्छी पारी खेलते हैं तो आप अपने सर्वश्रेष्ठ पर वापस आ जाते हैं। अंडर-16 के दिनों से ही वह काफी रन बनाते थे।

शुभमन गिल - फोटो : Social Media
गिल ने शुक्रवार को स्पिनरों और तेज गेंदबाजों दोनों के खिलाफ पैरों का खूब इस्तेमाल किया और आगे बढ़-बढ़कर शॉट खेले। खेल के पहले घंटे में गिल अपनी पीक पर थे। उन्होंने महान जेम्स एंडरसन के खिलाफ सीधे बल्ले से स्ट्रेट छक्का लगाया। लखविंदर ने कहा कि जब उनका बेटा स्क्वायर कट और कवर ड्राइव खेलता है तो उन्हें काफी अच्छा लगता है। शुभमन ने दोनों तरह के शॉट एचपीसीए स्टेडियम में लगाए।

शुभमन गिल - फोटो : Social Media
ओपनिंग को लेकर क्या बोले लखविंदर?
लखविंदर जब भी मोहाली में घर पर होते हैं तो शुभमन को ट्रेनिंग कराते रहते हैं। वह अपने बेटे के तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के फैसले से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'शुभमन को ओपनिंग जारी रखनी चाहिए थी। मुझे लगता है कि यह बिल्कुल भी सही नहीं है। जब आप ड्रेसिंग रूम में अधिक समय तक बैठते हैं, तो दबाव बढ़ जाता है। नंबर तीन न तो ओपनिंग नहीं कर रहा है और न ही यह मध्यक्रम का स्थान है।'

शुभमन गिल और रोहित शर्मा - फोटो : BCCI
उन्होंने कहा, 'साथ ही उनका खेल ऐसा नहीं है। यह चेतेश्वर पुजारा जैसे खिलाड़ियों को सूट करता है जिन्होंने डिफेंसिव खेल दिखाया। जब गेंद नई होती है तो आपको अधिक ढीली गेंदें मिलती हैं। जब आप पांच या सात ओवर के बाद मैदान पर आते हैं, तो गेंद तब भी चमकदार होती है और गेंदबाज भी अपनी लंबाई के साथ स्थिर होता है।' हालांकि, लखविंदर ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है और वह अपने बेटे द्वारा लिए गए फैसलों का सम्मान करते हैं।
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शुभमन गिल और रोहित शर्मा - फोटो : BCCI
उन्होंने कहा, 'मैं उनके फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करता। मैं बस उसके साथ ट्रेनिंग करता हूं। वह अपने फैसले खुद लेने की क्षमता रखते हैं। मैंने उनकी ओर से निर्णय तभी लिया जब वह किशोर थे।' लखविंदर ने राष्ट्रीय टीम से नहीं खेल रहे या चोटिल नहीं हुए भारतीय खिलाड़ियों के लिए रणजी ट्रॉफी खेलना अनिवार्य करने के लिए भी बीसीसीआई की सराहना की। उन्होंने कहा, 'कैलेंडर इतना व्यस्त होता है कि वह मुश्किल से रेड बॉल क्रिकेट के लिए ट्रेनिंग कर पाते हैं। यह ज्यादातर टूर्नामेंट्स व्हाइट बॉल से होते हैं। यही कारण है कि लाल गेंद से स्पिनरों के खिलाफ खेलना कठिन हो जाता है। यह अच्छा है कि बीसीसीआई ने यह कदम उठाया है।
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