सचिन ने अपने स्टैच्यू को लेकर कहा कि यह उनके लिए सुखद तोहफा है। उन्हें इस बारे में कोई अंदाजा नहीं था और वह खुद स्टैच्यू की बात सुनकर हैरान हैं। सचिन ने बताया कि इसी मैदान पर उनका करियर शुरू हुआ और कई कभी न भूलने वाली यादें उन्हें मिलीं। उनके करियर का सबसे सुखद लम्हा साल 2011 में आया, जब टीम इंडिया ने विश्व कप अपने नाम किया। सचिन ने यह भी बताया कि उनके कोच रमाकांत आचरेकर ने इसी मैदान पर क्रिकेट के प्रति उनके अंदर अलग रुचि जगाई थी और वह इस खेल में अपना करियर बनाने के लिए तन मन से जुट गए थे। इसी वजह से यह मैदान उनके लिए खास है और यहां पर स्टेच्यू लगना बड़ी बात है।
वनाखेड़े में पहला स्टैच्यू
वानखेड़े के स्टेडियम में पहली बार किसी खिलाड़ी का स्टैच्यू लगाया जा रहा है। वानखेड़े स्टेडियम में पहले से ही सचिन का नाम का एक स्टैंड है। भारत में खिलाड़ियों के ज्यादा स्टैच्यू नहीं हैं। भारत के पूर्व क्रिकेटर सीके नायडू के तीन स्टैच्यू अलग-अलग स्टेडियम में हैं। पहला स्टैच्यू विदर्भ क्रिकेट स्टेडियम में है, दूसरा आंध्र और तीसरा स्टैच्यू इंदौर के होल्कर स्टेडियम में है। हालांकि, कई खिलाड़ियों के वैक्स स्टैच्यू हैं और उनके नाम पर स्टैंड भी हैं। कई दिग्गज खिलाड़ियों के स्टैच्यू मैडम तुसाद म्यूजियम में भी हैं।
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज स्पिनर शेन वॉर्न का एक स्टैच्यू मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर हैं। वॉर्न ने इसका अनावरण 2011 में किया था। अब भारत के लिए 200 टेस्ट, 463 वनडे और एक टी20 खेलने वाले सचिन भी अपने स्टेच्यू का अनावरण करेंगे। सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा 100 शतक लगाने वाले खिलाड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा 34,357 रन भी उनके ही नाम हैं।