बिहार के एक छोटे शहर मोतिहारी के रहने वाले सकिबुल गनी ने अपने डेब्यू रणजी मैच में इतिहास रच दिया। वे अपने पहले ही प्रथम श्रेणी मैच में तिहरा शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। मिजोरम के खिलाफ जबरदस्त बल्लेबाजी करने वाले सकिबुल गनी के सामने अब 53 साल से चले आ रहे एक खराब रिकॉर्ड को तोड़ने की चुनौती है। इसके अलावा उनके सामने 'वन मैच वंडर' खिलाड़ी नहीं बनने की चुनौती भी है।
दरअसल, भारत के लिए प्रथम श्रेणी में 200 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले सकिबुल गनी 10वें बल्लेबाज बने हैं। उनसे पहले नौ खिलाड़ियों ने 200 या उससे ज्यादा रन तो बनाए थे, लेकिन किसी ने तिहरा शतक नहीं जड़ा था। हैरानी की बात है कि पहले के नौ खिलाड़ियों में सिर्फ एक को ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका मिल सका। ऐसा करने वाले इकलौते खिलाड़ी गुंडप्पा विश्वनाथ थे। उन्होंने 1969 में भारत के लिए पहला मैच खेला था।
गुंडप्पा विश्वनाथ ने मैसूर की ओर से खेलते हुए नवंबर 1967 में आंध्र प्रदेश के खिलाफ 230 रन बनाए थे। प्रथम श्रेणी में 18 हजार के करीब रन बनाने वाले विश्वनाथ भारत के महानतम बल्लेबाजों में एक माने जाते हैं। उन्होंने 91 टेस्ट में 6080 रन बनाए। इस दौरान 14 शतक लगाए हैं। उनके अलावा मणिपुर के मयंक राघव, पंजाब के जीवनजोत सिंह, मध्य प्रदेश के अंशुमन पांडे, पंजाब के अभिषेक गुप्ता, मध्य प्रदेश के अजय रोहेरा, चंडीगढ़ के अर्सलान खान, मुंबई के अमोल मजूमदार और गुजरात के मनप्रीत जुनेजा ने डेब्यू मैच में 200 रन से अधिक बनाए, लेकिन भारत के लिए नहीं खेल सके।
सकिबुल ने हर सातवीं गेंद पर मारा चौका
सकिबुल गनी ने मिजोरम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में 341 रन बनाए। उन्होंने 405 गेंदों की पारी में 56 चौके और दो छक्के लगाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 84.20 का रहा। सकिबुल की पारी को देखें तो उन्होंने हर सातवीं गेंद पर एक चौका मारा है। 341 में से 236 रन सिर्फ चौके-छक्के से लगाए।