विश्वसनीय हैं समाचार पत्र
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता व पहुंच बेहतर है। देश में खरीदकर अखबार पढ़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2013 में देश में समाचार पत्रों की संख्या 5767 थी जो 2015 में 7871 हो गई। आडिट ब्यूरो आफ सर्कुलेशन की इस माह जारी रिपोर्ट दिखाती है कि एक दशक में अखबार तेजी से बढ़े हैं। अखबार 2006 में 3.91 करोड़ प्रतियों से बढ़कर 2016 में 6.28 करोड़ प्रतियां तक पहुंच गए हैं। यह 60 फीसदी की बढ़त है।
ऐसा दुनिया में और कहीं नहीं हुआ है। भारत में वर्ष 2015 में अखबारों ने 12 फीसदी, यूके और अमेरिका में 7 फीसदी व जर्मनी और फ्रांस में तीन-तीन फीसदी बढ़त दर्ज की जबकि इसी दौरान इंटरनेट का प्रसार भी दस से बढ़कर 30 फीसदी हुआ। इसकी एक वजह साक्षरता दर में बढ़ोतरी भी है। ऐसे देश में जहां इंटरनेट हर समय उपलब्ध नहीं रहता अखबार ही ऐसा माध्यम है जो लोगों को खबरों से जोड़ता है।
प्रिंट से डिजिटल को मजबूती
प्रिंट नेटवर्क अपना दायरा बेहतरीन सामग्री की वजह से हर प्लेटफॉर्म पर बढ़ाता जा रहा है। साथ ही डिजिटल को भी प्रिंट से मजबूती मिलती है। वेब एडिशन और एप के अलावा पाडकास्ट भी माध्यम है।
महामारी में डिजिटल आगे बढ़ा
महामारी ने विज्ञापनदाताओं को डिजिटल की तरफ आकर्षित किया है, इसी वजह से सबसे बड़ा हिस्सा इस प्लेटफॉर्म को मिला। डिजिटल में इस वजह से नवोन्मेष भी हुए। किराना दुकानों और डिलीवरी बॉय की वजह से ही कोरोना महामारी में लोगों की जरूरतें पूरी हो पाईं। इससे डिजिटल माध्यमों का प्रसार बढ़ा। - प्रशांत कुमार, सीईओ, ग्रुप एम, दक्षिण एशिया
सभी मीडिया को होगा फायदा
वर्ष 2022 भारत में विज्ञापनों पर होने वाले खर्च के मामले में मील का पत्थर साबित होगा। इसकी वजह एक लाख करोड़ रुपये तक इस खर्च का पहुंचना है। इससे मीडिया के सभी प्लेटफार्म को फायदा होगा। सभी ब्रांडों ने महामारी से सबक लिए हैं। - सिद्धार्थ पाराशर, प्रेसीडेंट, इनवेस्टमेंट एंड प्राइसिंग, ग्रुप एम इंडिया
पारंपरिक मीडिया को भी बढ़त
कंपनियां और ब्रांड का तेजी से डिजिटल रूपांतरण हो रहा है, उपभोक्ताओं से वे जिस तरह से जुड़ रहे हैं, उससे विज्ञापनों पर होने वाले खर्च में वृद्धि को देखा जा सकता है, यहां तक कि पारंपरिक मीडिया को भी बढ़त मिल रही है। - अश्विन पद्मनाभन, प्रेसीडेंट, पार्टनरशिप एंड ट्रेडिंग, ग्रुप एम इंडिया