रणजी ट्रॉफी 2023-24 में मुंबई और बिहार के बीच मैच अब तक काफी हलचल भरा रहा है। मैदान के अंदर खिलाड़ी भी काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और दोनों टीमों के बीच अच्छा मुकाबला चल रहा है। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक बिहार का स्कोर 89/6 है। यह टीम अभी भी मुंबई के स्कोर से 162 रन पीछे है। 41 बार की चैंपियन मुंबई ने अपने एलीट ग्रुप बी मैच में पहली पारी में 251 रन बनाए थे। ऐसे में बिहार की हालत खराब दिख रही है। मैच में वापसी करने के लिए तीसरे दिन बिहार की टीम को बेहतरीन खेल दिखाना होगा।
खेल के अलावा अन्य घटनाओं की वजह से भी यह मैच चर्चा में रहा है। यह मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पटना के मोइन-उल-हक स्टेडियम पहुंचे। यह एक ऐसा मैदान है, जिसने 1996 में विश्व कप मुकाबलों की मेजबानी की थी। मैच शुरू होने से पहले बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के निलंबित पूर्व सचिव अमित कुमार ने बवाल कर दिया। अमित ने अपनी खुद की एक टीम नामित की थी। हालांकि, दो टीमों को केवल कागजों पर थीं और केवल बीसीए की टीम जिसे आधिकारिक टीम के रूप में नामित किया गया था, वह मैदान पहुंची। अमित ने कथित तौर पर गुस्से में एक अधिकारी पर हमला किया।
शुक्रवार दोपहर को बीसीए की विज्ञप्ति में कहा गया, "फर्जी टीम में शामिल लोगों ने बीसीए के ओएसडी मनोज कुमार पर जानलेवा हमला किया गया। उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
कौन हैं अमित कुमार?
अमित एक समय बीसीए अध्यक्ष राकेश तिवारी के उस गुट का हिस्सा थे, जिसने एसोसिएशन को बीसीसीआई की संबद्ध सदस्यता प्राप्त करने से पहले बीसीए चुनाव लड़ा था और जीता था, और उन्हें 2018-19 सीजन से पहले वरिष्ठ घरेलू प्रतियोगिताओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। उस समय, अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए), जिसे बीसीसीआई को चलाने का काम सौंपा गया था, ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए तीन सदस्यीय समिति में एक स्वतंत्र चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। भारत के पूर्व विकेटकीपर सबा करीम ने भी महाप्रबंधक के रूप में संस्था की औपचारिकता की देखरेख के लिए पटना का दौरा किया था।
लेकिन माना जाता है कि अमित के तिवारी के साथ रिश्ते 2022 में तनावपूर्ण हो गए, जब उन पर युद्धरत गुटों में से एक के साथ शामिल होने का आरोप लगाया गया। जब यह मामला तिवारी के नेतृत्व वाली व्यवस्था में लाया गया, तो अमित को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने तब से एसोसिएशन में कोई पद नहीं संभाला है, जिसके कारण, जिन टीमों को उन्होंने कागज पर नियुक्त किया है वे अमान्य हैं।
वैभव सूर्यवंशी ने 12 साल की उम्र में बिहार के लिए डेब्यू किया
बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने 12 साल और 284 दिन की उम्र में पहला रणजी मैच खेला। वह 1986 से प्रथम श्रेणी में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज सूर्यवंशी भारत अंडर-19 के लिए भी रेस में थे, उन्होंने बिहार के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी में पांच पारियों में 93 रन बनाए थे। उन पारियों ने उन्हें अंडर -19 चैलेंजर ट्रॉफी के साथ-साथ अंडर -19 चतुष्कोणीय में भी स्थान दिलाया, जिसमें बांग्लादेश और इंग्लैंड भी शामिल थे, जिसके बाद जूनियर चयन पैनल ने अंडर -19 विश्व कप के लिए अपनी भारतीय टीम का नाम घोषित किया।
जर्जर स्टेडियम में दर्शकों को चेतावनी दी गई
मुंबई के कप्तान अजिंक्य रहाणे की एक झलक पाने के लिए उमड़ी बड़ी भीड़ को संभालने में बीसीए को परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि, गर्दन में ऐंठन के कारण रहाणे यह मैच नहीं खेल पाए। लेकिन बड़ी संख्या में इकट्ठा हुई भीड़ का अभिवादन स्वीकार करने के लिए उन्होंने सीमा रेखा के चारो तरफ एक चक्कर लगाया। स्टेडियम की हालत जर्जर थी, यहां तक कि अंदर आने वाले दर्शक उन पोस्टरों के पीछे से गुजर रहे थे जिनमें उन्हें अपने जोखिम पर प्रवेश करने की चेतावनी दी गई थी।
तिवारी ने अपने बचाव में कहा, ''हां, हालत खराब है लेकिन इस स्टेडियम को विश्वस्तरीय बनाने की योजना है और इसके लिए टेंडर भी पास हो चुका है। इसे जल्द ही नया रूप दिया जाएगा, क्योंकि मैच अभी खेला जाना था, इसलिए हमने किसी तरह इसे खेलने लायक बना लिया है। हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही यह स्टेडियम पहले की तरह चमकने लगेगा।"