अनुभव को सम्मान देना
चेन्नई सुपर किंग्स की टीम में सबसे ज्यादा उम्रदराज खिलाड़ी शामिल हैं। इसलिए इसे सीएसके को बूढ़ी टीम भी कहा जाता है। खुद कप्तान धोनी 40 की उम्र पार कर चुके हैं। उनके अलावा टीम में शामिल फाफ डुप्लेसी, सुरेश रैना, इमरान ताहिर, ड्वेन ब्रावो ये सभी ज्यादा उम्र के खिलाड़ी हैं। सीएसके की सफलता का सबसे बड़ा राज यह है कि टीम अनुभवी खिलाड़ियों को वरीयता देती है। यही कारण है कि सीएसके का रुतबा सबसे अलग है।
खिलाड़ियों को पर्याप्त समय देना
एमएस धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स की दूसरी खूबी यह है कि टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को फॉर्म में वापस आऩे के लिए पर्याप्त मौका दिया जाता है। इस टीम में ऐसा नहीं होता कि अगर खिलाड़ी एक दो मैच में नहीं चला तो उसे बाहर कर दें। काफी अवसर देने के बाद अगर खिलाड़ी फ्लॉप रहता है तो उसके बाद बदलाव पर विचार किया जाता है। इस सीजन में सुरेश रैना इसका उदाहरण हैं।
खिलाड़ियों को आजादी देना
चेन्नई सुपर किंग्स एक ऐसा दल है जिसका टीम प्रबंधन अपने खिलाड़ियों को खेलने की पूरी आजादी देता है। सीएसके की ओर से खिलाड़ियों पर कभी दबाव नहीं डाला जाता है। यह कारण है कि टीम हमेशा शानदार सफलता अर्जित करती है।
बंद कमरे में मीटिेंग कम
सीएसके की एक और खासियत है कि बंद कमरे में मीटिंग बहुत कम होती हैं। खुद कप्तान धोनी भी कई बार कह चुके हैं कि उनके यहां टीम को लेकर मीटिेंग न के बराबर होती है। धोनी के मुताबिक हमारी मीटिंग खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस के दौरान होती है। इसका मतलब यह हुआ कि जितनी कम मीटिंग उतना कम खिलाड़ियों पर दबाव। यह कारण है कि चेन्ऩई की टीम आईपीएल की दूसरे सबसे सफल टीम है।
मैच न खेलने वाले खिलाड़ियों को पूरा सम्मान
सीएसके की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह मैच न खेलने वाले उन खिलाड़ियों का उसी तरह सम्मान करता है जो खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में होते हैं। आईपीएल के दूसरे सत्र में इमरान ताहिर समेत कुछ ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्हें मैच खेलने का मौका नहीं मिला लेकिन इस दौरान उन सभी खिलाड़ियों को बराबर सम्मान दिया गया।