'हम फिल्ड पर बेहद साधारण रहे। हमनें एक मौका भी गंवाया। हमें खुद को सुधारना होगा।' मैच के बाद विराट कोहली ने भारतीय टीम की फिल्डिंग को साधारण बताया। मगर यह काफी नहीं है, क्योंकि इस सुस्ती को खामियाजा टीम को हार के साथ चुकाना पड़ा। महज 10 रन पर खेल रहे टेलर स्लॉग स्विप करने के प्रयास में शॉट हवा में मार बैठे। फाइन लेग पर खड़े कुलदीप यादव के पास सुनहरा मौका था। हालांकि कैच आसान नहीं था, लेकिन एक इंटरनेशनल खिलाड़ी से असाधारण प्रदर्शन की उम्मीद की ही जा सकती है। बाएं हाथ के कलाई स्पिनर कुलदीप ने निराश किया। टेलर ने 84 गेंदों में 109 रन की मैच जिताऊ पारी खेल डाली। कैच के अलावा मोहम्मद शमी ने डीप पर दो बार गेंद बाउंड्री के पार जाने दी। हेनरी निकोलस का रनआउट देखने के बाद ऐसा लगा मानो मैदान पर अकेले विराट कोहली ही पूरे जज्बे के साथ फिल्डिंग कर रहे हैं।
347 रन बचाने उतरी टीम इंडिया के गेंदबाजों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह जीत के प्रति आश्वस्त हैं। बॉलर्स ने 29 रन अतिरिक्त दिए। 4.1 ओवर्स एकस्ट्रा फेंके। 12 साल बाद ऐसा हुआ जब भारतीय खिलाड़ियों ने 30 वाइड गेंदें फेंकी हो। पाटा पिच और छोटे मैदान पर इस तरह की गलती आत्महत्या ही मानी जाती है। विरोधियों ने भी यही किया, हाथ आए मौके को दोनों हाथों से भुनाया और इतने बड़े स्कोर को 11 गेंद शेष रहते ही साधकर नया इतिहास रच दिया। यह लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी जीत थी।
भले ही चौथे टी-20 में शार्दुल ठाकुर ने गजब की गेंदबाजी की हो, आखिरी ओवर में सात रन बचाते हुए मैच सुपर ओवर तक ले गए हो और उस मैच का विजेता भारत बना हो, लेकिन उनकी इस वापसी से वह सफेद गेंद के फॉर्मेट में टीम इंडिया के स्थायी गेंदबाज नहीं बन जाते।
खासकर तब जब आपके पास बेंच पर नवदीप सैनी जैसा कोई युवा तूफानी गेंदबाज हो, जो टी-20 सीरीज में अपने खेल से मैन ऑफ द सीरीज चुना गया हो। सैनी के पास पेस है। न्यूजीलैंड की तेज, उछाल भरी पिच पर वह विपक्षियों की बखिया उधेड़ने की ताकत रखता है। तरकश में सटीक यॉर्कर हैं। कोहली ने प्लेइंग इलेवन में उन्हें बाहर बिठाकर शार्दुल ठाकुर को खिलाया।
ठाकुर ने अपने 10 ओवर्स के कोटे में 80 रन खर्च कर डाले। टेलर और लॉथम ने उनकी स्लोअर बॉल्स पर जमकर धुनाई की। अपने आखिरी नौ एकदिवसीय मैच में ठाकुर ने 51.33 की औसत से सिर्फ 9 विकेट लिए हैं, जबकि सैनी का औसत 37 का है, इसलिए पहले वन-डे के लिए भारतीय टीम का चयन संदिग्ध हो जाता है।