तीसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद केएल राहुल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, मेरे मन में बहुत सारे विचार आते थे, मैं टेस्ट क्रिकेट में हर गेंद पर दो या तीन तरह के अलग-अलग शॉट्स खेल सकता हूं, इसलिए मुझे एहसास हुआ कि इस पर मुझे नियंत्रण करना सीखना होगा। बीता 2018 का दौरा उनके लिए काफी निराशाजनक रहा था। इस दौरे पर राहुल 10 पारियों में से सिर्फ एक में शतक लगाते हुए 149 रन बनाए थे। उस टेस्ट सीरीज में राहुल का स्कोर 4, 13, 8, 10, 23, 36, 19, 0, 37 और 149 रहा था।
केएल राहुल के मुताबिक, जब विकेट चुनौतीपूर्ण होता है तो खेलना मुश्किल हो जाता है, अच्छे गेंदबाजों के विरुद्ध खेलना उस समय जब उनकी गेंदें स्विंग कर रही हो आपको कुछ शॉट्स को रोकना पड़ता है, इसलिए ये चीजें हैं जिन पर मैंने काम करने की कोशिश की या मैंने उस समय सीखी थीं जब मैं टेस्ट क्रिकेट में असफल हो रहा था। उन्होंने आगे कहा, टीम से बाहर रहकर दूसरे बल्लेबाजों से यह सीखा कि वह रन कैसे बना रहे हैं।
केएल राहुल ने आगे कहा, मुझे टेस्ट क्रिकेट खेलने का बहुत अधिक मौका नहीं मिला, लेकिन बाहर बैठना, खेल देखना और बल्लेबाजों को रन बनाते देखना मेरे लिए काफी अच्छा था, मैं क्रिकेट खेल रहा हूं, इसलिए मानसिक रूप से क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में यह महत्वपूर्ण है कि शॉट का सही चयन किया जाए, मैं बहुत खुश हूं कि मैंने आज अनुशासन दिखाया जिसके चलते टीम को अच्छी शुरुआत मिली और हम अच्छी स्थिति में हैं।
बातचीत के दौरान केएल राहुल ने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड की तारीफ की। उन्होंने कहा, इंग्लैंड में खेलना काफी चुनौतीपूर्ण है, उनके पास दुनिया का सबसे अच्छा तेज बॉलिंग आक्रमण है, जो क्रिकेट देखते हैं वे जानते हैं कि एंडरसन और ब्रॉड कितने कुशल गेंदबाज हैं, उनके खिलाफ खेलना काफी चुनौतीपूर्ण है।