भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे दो टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में एक अजीब सा वाकया देखने को मिला। मैच के दूसरे दिन शनिवार (पांच मार्च) को कप्तान रोहित शर्मा ने आठ विकेट पर 574 रन के स्कोर पर भारत की पारी को घोषित करने का फैसला किया। उस समय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा 175 रन बनाकर क्रीज पर थे। रोहित के फैसले के कारण जडेजा अपने करियर का पहला दोहरा शतक लगाने से चूक गए।
इसके बाद सोशल मीडिया पर रोहित शर्मा की आलोचना होने लगी। लोगों ने उनकी तुलना मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ से की। द्रविड़ ने 29 मार्च 2004 को पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान टेस्ट में उस समय पारी घोषित करने का फैसला किया था जब सचिन तेंदुलकर 194 रन बनाकर नाबाद थे। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद जडेजा ने इस बात का खुलासा किया कि क्यों रोहित ने उस समय पारी घोषित की थी।
जडेजा ने कहा, "टीम प्रबंधन को मैंने पारी घोषित करने के लिए कहा था, क्योंकि उस समय श्रीलंकाई खिलाड़ी थके हुए थे। इसका फायदा हम उठा सकते थे। हमारे पास उन्हें आउट करने का बेहतरीन मौका था।" जडेजा का यह अनुमान सटीक बैठा। श्रीलंकाई खिलाड़ी पहली पारी में असहज दिखे। उन्होंने अपने चार विकेट 108 रन पर गंवा दिए।
जडेजा ने बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया। उन्होंने श्रीलंकाई कप्तान दिमुथ करूणारत्ने को आउट किया। उन्होंने 28 रन बनाए। कप्तान के अलावा श्रीलंका के लहिरू थिरिमाने 17 रन बनाकर अश्विन, एंजेलो मैथ्यूज 22 रन बनाकर बुमराह और धनंजय डी सिल्वा एक रन बनाकर अश्विन का शिकार हो गए।
जडेजा ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपना शतक अपने साले को समर्पित किया। उन्होंने कहा, "मैं अपना शतक अपने साले को समर्पित कर रहा हूं। उन्होंने कई बार मुझसे कहा है कि अगर मैं अगली बार शतकीय पारी खेलता हूं तो मुझे अपना शतक उन्हें समर्पित करना चाहिए।"
भारत के लिए पहली पारी में जडेजा के अलावा ऋषभ पंत ने 96 रन बनाए। रविचंद्रन अश्विन ने 61, हनुमा विहारी ने 58, विराट कोहली ने 45, मयंक अग्रवाल ने 29, श्रेयस अय्यर ने 27 और मोहम्मद शमी ने नाबाद 20 रन बनाए। जयंत यादव दो रन बनाकर आउट हुए। श्रीलंका के लिए सुरंगा लकमल, विश्वा फर्नांडो और एम्बुलडेनिया ने दो-दो विकेट लिए।