टीम इंडिया अगर इस बार सेमीफाइनल खेल रही है तो इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ विराट कोहली को दिया जा सकता है, क्योंकि यही वो बल्लेबाज है जिसने अकेले अपने दम पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक जंग में करिश्माई पारी खेलकर टीम को अंतिम-चार में पहुंचाया।
मेजबान टीम जब अपने शुरुआती मैच में न्यूजीलैंड से हार गई थी तो उस समय उसके आगे के सफर पर सवाल उठने लगे, लेकिन टीम की 'रन मशीन' कोहली ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अविजित अर्धशतकीय (55) पारी खेलकर भारत को जीत दिलाने के साथ-साथ उम्मीद की किरण भी जगा दी। फिर अंतिम मैच में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 82 रनों की पारी ने तो कमाल ही कर दिया क्योंकि इस पारी ने टीम को नायाब जीत दिलाई और भारत सेमीफाइनल में पहुंच गया। बांग्लादेश के खिलाफ लो स्कोरिंग मैच में भी उन्होंने 24 रनों की पारी खेली थी।
कोहली बिना रुके रन बना रहे हैं ज्यों-ज्यों लेवल बढ़ता जा रहा है इस बल्लेबाज से उम्मीदें भी बढ़ती जा रही है। इस साल की बात करें तो उन्होंने 12 टी-20 मैच खेले हैं जिसमें 11 बार बल्लेबाजी करने का मौका मिला और उन्होंने 536 रन बनाए हैं। साथ ही इन 11 मौकों पर 6 फिफ्टी लगाई और 2 बार 40 से ज्यादा का स्कोर किया। इस दौरान वह हर मैच में 20 से ज्यादा रन बनाने में कामयाब भी रहे।
ऐसा नहीं है कि जो बल्लेबाज आज जोरदार फॉर्म में चल रहा है वो अगले मुकाबले में भी मैच जीताऊ पारी खेले। अगर टीम इंडिया की 'रन मशीन' कोहली विस्फोटक बल्लेबाजों से लबरेज कैरेबियाई टीम के सामने सेमीफाइनल मैच में बल्ले से नाकाम हो जाते हैं तो इस परिस्थिति में टीम इंडिया को क्या करना होगा और किस तरह से इस बड़े संकट से उबरने की योजना बनानी होगी?
कोहली अगर चूके तो इन 4 पर होगी जिम्मेदारी
सुरेश रैना
टीम इंडिया ने पिछले एक-दो साल में जीतने भी मैच जीते हैं उनमें 50 फीसदी से ज्यादा में जीत का योगदान विराट कोहली का ही रहा है। कोहली लगातार रन बना रहे हैं ऐसे में अगर वह किसी एक मैच में नाकाम रहते हैं तो उनके लिए यह सामान्य सी बात होगी, लेकिन इससे टीम के लिए संकट कि स्थिति पैदा हो सकती है। कोहली ने बल्लेबाजी के दौरान लगातार एक छोर संभाले रखा है ऐसे में उनके नाकाम होने से धोनी की रणनीति पर पारी फिर सकता है।
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में विंडीज के खिलाफ मैच में माना जा रहा है कि खूब रन बनेंगे। इस मैच में कोहली के मौका चूकने से बल्लेबाजी के लिहाज से धोनी और टीम के पास ये 4 बड़े विकल्प ही रहेंगे।
पहला, बांग्लादेश के खिलाफ मैच में सुरेश रैना ने 30 का स्कोर किया था और वह वानखेड़े में भारत के अगले खेवनहार बन सकते हैं। पिछले 2 मैचों से उन्होंने 10 से ज्यादा रन बनाए हैं। वह क्रीज पर कुछ देर टिकने के बाद रन बनाने में माहिर हैं। टी-20 के विशेषज्ञ बल्लेबाज और धोनी के बेहद खास रैना ने बहुत दिन से बड़ा स्कोर नहीं किया है, उनकी आखिरी फिफ्टी भी 2010 में आई है। ऐसे में यह मैच उनके लिए बड़ा साबित हो सकता है और उन्हें जिम्मेदारी के साथ खेलना ही होगा।
दूसरा, अनुभवी ऑलराउंडर युवराज सिंह के बाहर होने के बाद टीम में मनीष पांडेय को शामिल किया गया है। हालांकि मैच के लिए अंतिम एकादश पर फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन बहुत संभावना है कि उन्हें इस मैच में खेलने का मौका मिल जाए। सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जो शानदार शतकीय पारी खेली थी वही उन्हें यहां पर दोहराना होगा। हालांकि तब भी वह चोटिल खिलाड़ी की जगह टीम में शामिल हुए थे और इस बार भी तो इस लिहाज से वह बड़ी पारी खेलेंगे यहां पर।
तीसरा, खुद कप्तान धोनी भी एक सक्षम बल्लेबाज हैं और स्लॉग ओवर्स में तेज बल्लेबाजी करते हैं। कोहली अगर इस मैच में नाकाम हुए तो वह अपनी बल्लेबाजी से इसे धो सकते हैं। आईपीएल में कई कैरेबियाई खिलाड़ियों के साथ खेल चुके हैं जिसका फायदा उन्हें इस मैच में मिल सकता है। 2007 से टी-20 की कप्तानी कर रहे धोनी को इस खेल में अपनी पहली फिफ्टी का इंतजार है और उन्हें भरपूर मौका मिला तो उनके खाते मे पहला पचासा इस मैच से आ सकता है।
चौथा, कोहली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं और बल्लेबाजी क्रम में यह बेहद निर्णायक होता है। यह क्रम पहले विकेट के प्रदर्शन को आगे बढ़ाने या खराब शुरुआत के बाद उसे संवारने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। कोहली अगर इस बार चूक जाते हैं तो मध्य क्रम में युवराज सिंह की अनुपस्थिति में हार्दिक पांड्या का रोल खास हो जाता है। पांड्या आक्रामक बल्लेबाजी में माहिर हैं। वर्ल्ड कप में भी उन्होंने अपना जलवा दिखाया है और इस निर्णायक मौके पर भी उनसे बड़ी पारी की आस होगी ही।
जीते तो आसानी से पार हो जाएगी टीम इंडिया की 'नैया'
विराट कोहली
कोई भी मैच किसी एक खिलाड़ी के भरोसे नहीं जीते जाते। विराट कोहली इस समय टीम इंडिया की जीत के ट्रंप कार्ड हैं। लेकिन सेमीफाइनल में अगर वह नाकाम होते हैं तो उनकी जगह अगर ये 4 बल्लेबाज भी चल जाते हैं तो टीम इंडिया की नैया आराम से पार हो जाएगी और फाइनल के द्वार पर पहुंच जाएगी।
जहां तक दोनों टीमों का सवाल है तो दोनों ही टीमें सुपर-10 में हार झेल चुकी हैं। वहीं दोनों टीमें टी-20 वर्ल्ड कप में 3 मैच एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुकी हैं जिसमें वेस्टइंडीज को 2 में जीत मिली है।