शार्दुल 15 सदस्यीय टीम का हिस्सा नहीं थे इसलिए बारिश के बाद साउथम्पटन में हालात तेज गेंदबाजी के अनुकूल होने के बावजूद उन्हें तेज गेंदबाजी आलराउंडर के रूप में अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीसी फाइनल और 4 अगस्त से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू हो रही पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला के लिए भुवनेश्वर को टीम में नहीं चुनना निराशाजनक है।
सरनदीप ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, दो दिन पहले अंतिम एकादश का चयन किया गया तो उसमें दो स्पिनरों की मौजूदगी ठीक थी। लेकिन इसमें बदलाव किया जाना चाहिए था क्योंकि बारिश के बाद हालात तेज गेंदबाजी के अनुकूल हो गए थे उन्होंने कहा, आपने दो स्पिनर चुने क्योंकि वे बल्लेबाजी कर सकते थे। एकमात्र तेज गेंदबाज जो बल्लेबाजी कर सकता है वह शार्दुल है और वह 15 सदस्यीय टीम में भी नहीं था। वह अंतिम एकादश में जगह बनाता या नहीं, उसे 15 सदस्यीय टीम में उसे जरूर होना चाहिए था।
श्रीलंका में अगले महीने होने वाली सीमित ओवरों की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम के उप कप्तान बनाए गए भुवनेश्वर के बारे में सरनदीप ने कहा कि इस तेज गेंदबाज का इंग्लैंड दौरे पर जाने वाली टीम में स्वत: चयन होना चाहिए था। उन्होंने कहा, भुवनेश्वर को इंग्लैंड नहीं ले जाना बेहद बड़ी गलती है। वह आपका सर्वश्रेष्ठ स्विंग गेंदबाज है और वह टीम का हिस्सा तक नहीं है।
सरनदीप ने कहा कि शार्दुल जैसे किसी खिलाड़ी को तेज गेंदबाजी आलराउंडर के रूप में तराशने का समय आ गया है क्योंकि हार्दिक पांड्या लंबे प्रारूप में गेंदबाजी के लिए फिट नहीं हैं। उन्होंने कहा, आप सिर्फ हार्दिक पर निर्भर नहीं रह सकते। आपको नहीं पता कि वह सभी प्रारूपों में गेंदबाजी करने के लिए कब फिट होगा इसलिए शार्दुल जैसे किसी खिलाड़ी को निखारने की जरूरत है।
सरनदीप ने उम्मीद जताई कि मोहम्मद सिराज को इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की श्रृंखला में नियमित रूप से मौका मिलेगा। उन्होंने कहा, इस श्रृंखला में रोटेशन पॉलिसी लागू होगी। यह सिराज को मौका देने का सही समय है और उसे अधिक से अधिक मैच खिलाने चाहिए। वह अच्छी गेंदबाजी कर रहा है। अगर लंबा अंतर आ जाता है तो उसे तुरंत सही लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करने में मुश्किल हो सकती है। वहीं पूर्व भारतीय स्पिनर सरनदीप ने भारतीय कप्तान विराट कोहली से सहमति जताई जिन्होंने कहा था कि आसमान में छाए बादलों के बीच बल्लेबाजी करते हुए अधिक जज्बा दिखाने की जरूरत थी।