श्रीलंका को वनडे सीरीज में 3-2 से मात देने वाली जिंबाब्वे का 21 साल बाद किसी बड़ी टीम के खिलाफ टेस्ट मैच जीतने का सपना चकनाचूर हो गया। मैच के चौथे दिन जिंबाब्वे ने श्रीलंका की दूसरी पारी में 3 विकेट झटककर जीत से सात विकेट दूर रह गई थी लेकिन लेकिन मैच के पांचवें दिन जीत का सपना चार कदम दर रह गया।
चौथी पारी में जिंबाब्वे ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 388 रन का लक्ष्य रखा। चौथे दिन खेल की समाप्ति तक तीन मेजबान विकेट खोकर 170 रन बना लिए थे। मैच के पांचवे और आखिरी दिन श्रीलंका को जीत के लिए आखिरी दिन 218 रन बनाने थे और उसके 7 विकेट शेष थे। चौथे दिन के खेल की समाप्ति पर कुशल मेंडिस 60 और एंजेलो मैथ्यूज 17 रन बनाकर क्रीज पर थे।
पांचवें दिन इन दोनों खिलाड़ियों की जोड़ी 8 रन और जोड़ सकी और कुशल मेंडिस कप्तान क्रीमर की गेंद पर कैच दे बैठे। मेंडिस ने 66 रन बनाए। इसके बाद पूर्व कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने थोड़ी देर डिकवेला का साथ दिया लेकिन 25 रन बनाने के बाद वो भी क्रीमर की गेंद पर उन्हें ही कैच देकर पवेलियन लौट गए।
203 रन पर पांच विकेट गंवाने के बाद श्रीलंकाई टीम परेशानी में आ गई लेकिन इसके बाद छठे विकेट के लिए डिकवेला और गुनारत्ने के बीच हुई शतकीय साझेदारी ने श्रीलंका को न केवल परेशानी से निकाला बल्कि उसे जीत के करीब ले गए। जब श्रीलंका जीत से 64 रन दूर थी तब डिकवेला को 81 रन पर कैच कराकर विलियम्स ने आशा की एक किरण जगाई लेकिन इसके बाद जिंबाब्वे का कोई गेंदबाज करिश्माई प्रदर्शन नहीं कर पाया और श्रीलंका ने 4 विकेट से मैच अपने नाम कर लिया। अंत में गुणारत्ने 80 और दिलुवरन परेरा 29 रन बनाकर नाबाद रहे।
चौथी पारी में श्रीलंका द्वारा बनाए 391 रन चौथी पारी में श्रीलंकाई धरती पर बना सबसे बड़ा स्कोर होने के साथ सबसे बड़ा चेज भी है।