यह इंग्लैंड का आखिरी विकेट था और टीम 16 रन से हार गई थी। इसके बाद इंग्लैंड के कई खिलाड़ियों ने इसे खेलभावना के विपरीत बताया था और दीप्ति को गलत ठहराया था। हालांकि, कप्तान हरमनप्रीत कौर, वीरेंद्र सहवाग, रविचंद्रन अश्विन, एलेक्स हेल्स और यहां तक कि क्रिकेट के नियम बनाने वाली मेरिलेबोन क्रिकेट क्लब ने दीप्ति के फैसले को सही ठहराया और उनका समर्थन किया। अब खुद दीप्ति ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए बयान दिया है। उन्होंने भारत में एयरपोर्ट पर उतरने के बाद मीडिया से बातचीत की और अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया है।
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दीप्ति ने बताया है कि उन्होंने इसको लेकर पहले ही प्लान बना लिया था। साथ ही उन्होंने अंपायर से कहकर चार्लोट डीन को कई चेतावनियां दी थीं। दीप्ति ने बॉलिंग करते हुए रुककर नॉन-स्ट्राइकर एंड पर बेल्स उखाड़ दिए थे और इंग्लैंड को 3-0 से क्लीन स्वीप करने में मदद की थी। दीप्ति ने कहा- यह एक योजना थी, क्योंकि हमने डीन को कई बार क्रीज छोड़ने के लिए चेतावनी दी थी। हमने नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार चीजें कीं। हमने अंपायरों को भी बताया, लेकिन वह बार-बार क्रीज के बाहर जा रही थी। हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक चार्लोट बल्लेबाजी के दौरान करीब 73 बार नॉन स्ट्राइकिंग एंड पर गेंदबाजों के गेंद फेंकने से पहले क्रीज छोड़ दिया था। यानी की उन्होंने जितनी देर बल्लेबाजी की उसमें औसतन चार्लोट ने एक ओवर की छह गेंदों पर नॉन स्ट्राइकर एंड का क्रीज छोड़ दिया था। मैच के दौरान चार्लोट को आउट करने से पहले दीप्ति ने कप्तान हरमनप्रीत से बातचीत भी की थी। हरमन ने भी मैच के बाद दीप्ति का समर्थन किया और कहा कि दीप्ति ने कोई अपराध नहीं किया है।
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मैच के बाद जब हरमनप्रीत से मांकडिंग को लेकर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा- हमने जो कुछ भी किया है, मुझे नहीं लगता कि यह कोई अपराध था। यह खेल का हिस्सा है और आईसीसी का एक नियम है। मुझे लगता है कि हमें अपने खिलाड़ियों का समर्थन करने की जरूरत है। मैं वास्तव में बहुत खुश हूं कि दीप्ति को इस बारे में पता था। उस वक्त बल्लेबाज बार-बार क्रीज से काफी आगे निकल जा रही थी। मुझे नहीं लगता कि दीप्ति ने कुछ गलत किया है।
तीन मैचों की वनडे सीरीज के तीसरे और अंतिम मैच को जीतने के लिए इंग्लैंड को 17 रनों की आवश्यकता थी। चार्लोट डीन ने फ्रेया डेवीज के साथ 10वें विकेट के लिए 35 रन की साझेदारी कर ली थी। डीन अर्धशतक के करीब थीं, लेकिन दीप्ति ने अपनी सूझबूझ से डीन को पवेलियन भेज दिया और टीम इंडिया को जीत दिलाई। कभी-कभी, नॉन-स्ट्राइकर एंड पर बल्लेबाज अपनी क्रीज छोड़ देता है, जबकि गेंदबाज अपनी अंतिम बॉलिंग स्ट्राइड में होता है। यदि कोई गेंदबाज इसे देखता है, तो वह खेल के नियमों के अनुसार कानूनी रूप से उस बल्लेबाज को रन आउट करने का प्रयास कर सकता है।
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भारतीय क्रिकेट के दिग्गज वीनू मांकड ने 1947-48 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया के बिल ब्राउन को रन आउट कर इसकी शुरुआत की थी। उन्होंने भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ऐसा किया था। बाद में इसे 'मांकडिंग' नाम दिया गया। हालांकि कई क्रिकेटरों का तर्क है कि यह खेल की भावना के खिलाफ है, लेकिन आईसीसी का कहना है यह खेल के नियमों के अनुसार पूरी तरह से कानूनी है।