य़ाद है या भूल गए? 2016 का टी-20 विश्व कप भारतीय सरजमीं पर खेला जा रहा था। पहले एडिशन की चैंपियन टीम इंडिया इस बार खिताब की प्रबल दावेदार थी, लेकिन सेमीफाइनल में खेला हो गया। 'ब्लैक स्ट्रॉम' ने भारत को तबाह कर दिया और वेस्टइंडीज फाइनल में। किसी कमजोर को समर्थन करना मानवीय गुण माना जाता है। अब हर हिंदुस्तानी की यही चाहत थी कि जिस वेस्टइंडीज ने हमें टूर्नामेंट से बाहर किया वही इंग्लैंड को हराए और टूर्नामेंट का चैंपियन बन जाए।
इंग्लैंड ने दिया 156 रन का लक्ष्य
3 अप्रैल को कोलकाता का ईडन गार्डंस खचाखच भरा हुआ था। फाइनल में कैरेबियाई टीम ने टॉस जीता और इंग्लैंड को बल्ला थमाया। जो रूट की फिफ्टी के बाद अब कैरेबियाई टीम के सामने 156 रन का लक्ष्य था, लेकिन शुरुआती तीन ओवर में ही वेस्टइंडीज के तीन विकेट गिर गए। इंग्लैंड तेजी से जीत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन बीच में अनुभवी मार्लन सैमुअल्स आ गए। यहां से इंग्लैंड दबाव में आने लगा। 15 ओवर में टीम का स्कोर 104/4 हो चुका था। रिक्वायर्ड रन रेट 10.40 आसमां छू रहा था।
सैमुअल्स ने संभाले रखा एक मोर्चा
जीत अब भी 52 रन दूर थी, जिसे सिर्फ पांच ओवर में पूरा करना था। सैमुअल्स का साथ आंद्रे रसेल निभा रहे थे। अभी डैरेन सैमी का भी आना बाकी था, लेकिन ये टी-20 है जनाव एक और ट्वीस्ट जो बचा था। 16वें ओवर में वेस्टइंडीज ने दो बड़े विकेट गंवा दिए। अब जीत मुश्किल लग रही थी। यहां होती है आज के हीरो कार्लोस ब्रैथवेट की मैदान पर एंट्री। आठवें नंबर पर उतरे 27 साल के ब्रैथवेट को पता था कि उन्हें करना क्या है। बारबडोस के इस बल्लेबाज ने मौज करा दी। पहले संयम दिखाया और मैच आखिरी ओवर तक ले गए, जहां छह गेंदों में 19 रन चाहिए थे।
बेन स्टोक्स vs कार्लोस ब्रैथवेट
कप्तान इयोन मॉर्गन ने 20वें ओवर की जिम्मेदारी 24 साल के बेन स्टोक्स को दी। जिनकी आज गिनती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर्स में की जाती है तब वह अनुभव की आग में तपे नहीं थे। स्ट्राइक ब्रैथवेट के पास थी। दोनों ही खिलाड़ियों के पास हीरो बनने का बराबरी का मौका। पहली गेंद लेग स्टंप पर हाफ वॉली, इस घटिया बॉल का खामियाजा तो इंग्लैंड को उठाना ही था। डीप बैकवर्ड स्क्वैयर लेग पर दनदनाता हुआ छक्का। अब दबाव स्टोक्स के चेहरे पर देखते ही बनता है। दूसरा छक्का तो उससे भी बेहतर। इस बार कार्लोस ने लॉन्ग ऑन क्षेत्र को चुना। पूरी ताकत से मारे शॉट पर दर्शक झूम उठे।
कार्लोस ब्रैथवेट....नाम याद रखना.
अब तीन गेंद में जीत के लिए सिर्फ सात रन चाहिए थे। बल्लेबाज ने आधा काम तो कर ही दिया था अब गलती की बार स्टोक्स की ओर से थी। हुआ भी यही। लगातार तीन गेंदों पर तीन छक्के। डग आउट में 'चैंपियंस' डांस शुरू। अब कोई चमत्कार ही इंग्लैंड को बचा सकता था। तीन गेंदों में उसे एक रन बचाना था, स्कोर टाई हो चुका था। कोई दूसरी टीम होती तो आराम से एक रन लेकर मैच खत्म करतीस लेकिन वेस्टइंडीज हमेशा से ही अलग, बेखौफ अंदाज के लिए जानी जाती रही है।
मगर खचाखच भरे स्टेडियम में फाइनल का तनाव 6 फीट चार इंच लंबे इस खिलाड़ी के सामने बौना साबित हुआ। लगातार चौथा छक्का और अंडरडॉग माने जा रहे वेस्टइंडीज ने दूसरी बार टी-20 विश्व कप जीता। इयान बिशप की कमेंट्री ने इस मैच और फाइनल ओवर को अमर कर दिया। कार्लोस ब्रैथवेट... यह नाम याद रखना। इस कारगुजारी को लंबे समय तक याद किया जाएगा।