सचिन तेंदुलकर ने जनवरी 2000 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्राई-सीरीज के बाद कप्तानी पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से उन्होंने टेस्ट में 125 मैचों की 210 पारियों में 52.51 की औसत से 9926 रन बनाए थे। इसमें 29 शतक और 44 अर्धशतक शामिल है। इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर 248* रन का रहा। सचिन कुल 21 बार नॉटआउट रहे थे।
वहीं, वनडे में उन्होंने 226 मैचों की 222 पारियों में 47.57 की औसत से 9657 रन बनाए थे। इस दौरान सचिन ने 25 शतक और 51 अर्धशतक लगाए। इस कड़ी में वे वनडे में दोहरा शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बैट्समैन भी बने। यह कारनामा उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ किया था। सचिन ने 2012 में वनडे और 2013 में टी-20 और टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।
धोनी ने दिसंबर 2014 में टेस्ट की कप्तानी से इस्तीफा दिया था। इसके बाद वे सीमित ओवर क्रिकेट में टीम के कप्तान बने हुए थे। हालांकि, 2017 में धोनी ने बाकी दोनों फॉर्मेट से भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से उन्होंने कुल 67 वनडे और 25 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले। वनडे में धोनी ने 48.91 की औसत से 1663 रन बनाए। इसमें 1 शतक और 12 अर्धशतक शामिल है। 67 मैचों की 51 पारियों में से धोनी 17 पारियों में नॉटआउट रहे।
वहीं, टी-20 की बात की जाए तो 25 मैचों की 22 पारियों में उन्होंने 42.08 की औसत से 505 रन बनाए। इसमें 2 अर्धशतक शामिल है। 2019 विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों मिली हार के बाद से धोनी ने कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला और 15 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।
| तीनों फॉर्मेट में प्रदर्शन |
मैच |
रन |
औसत |
अर्धशतक |
शतक |
| सचिन कप्तानी के दौरान |
98 |
4508 |
42 |
19 |
13 |
| सचिन कप्तानी के बाद |
352 |
19593 |
49.85 |
95 |
54 |
| धोनी कप्तानी के दौरान |
332 |
11207 |
46.89 |
71 |
11 |
| धोनी कप्तानी के बाद |
92 |
2168 |
46 |
14 |
1 |
विराट फिलहाल फॉर्म में नहीं चल रहे
ऐसे में विराट भी कप्तानी के दबाव से दूर होकर अपने करियर को पुनर्जीवित कर सकते हैं। उन्होंने दिसंबर 2019 के बाद से तीनों फॉर्मेट मिलाकर 45 मैचों की 53 पारियों में 40.87 की औसत से 1921 रन बनाए हैं। इनमें 19 अर्धशतक तो हैं, पर एक भी शतक नहीं है।
32 साल के विराट के पास अभी भी टीम को देने के लिए 5-6 साल हैं। वे भी चाहते हैं कि उनकी बल्लेबाजी को अधिक समय और अधिक स्पीड मिले। इसके लिए लिमिटेड ओवर की कप्तानी छोड़ना सबसे अहम कड़ी है। 2022 और 2023 में भारत को दो विश्व कप खेलने हैं। इन दोनों टूर्नामेंट में विराट की बल्लेबाजी को अहम माना जा रहा है।