उन्होंने कहा, 'दुनिया भर में इस समय रोटेशन के आधार पर ही खिलाड़ियों का चयन हो रहा है चूंकि लगातार बायो बबल में रहना आसान नहीं है। युवा खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिये भी यह मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है।' उन्होंने कहा, 'भविष्य में भी शायद ऐसा ही होगा। अगर आप दूसरे या तीसरे दर्जे की टीम भी भेजते हैं तो वह तीसरे दर्जे की नहीं होगी बल्कि यह रोटेशन के तहत किया गया बंदोबस्त है।' श्रीलंका क्रिकेट ने भी रणतुंगा को जवाब देते हुए कहा था, 'भारतीय टीम के 20 सदस्यों में से 14 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं लिहाजा यह दूसरे दर्जे की टीम नहीं है जैसा कि दावा किया गया है।'
शिखर धवन की कप्तानी में भारत की युवा टीम श्रीलंका दौरे पर सीमित ओवरों की श्रृंखला के लिए आई है। तीन मैचों की वनडे श्रृंखला 13 जुलाई से शुरू होगी। विराट कोहली की कप्तानी में सीनियर खिलाड़ी इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलेंगे। विश्व कप विजेता पूर्व कप्तान रणतुंगा ने दूसरे दर्जे की भारतीय टीम की मेजबानी के लिए श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को लताड़ते हुए कहा था कि यह किसी अपमान से कम नहीं है।
बता दें कि भारत के श्रीलंका दौरे पर पांच खिलाड़ियों को पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया, जिसमें के गौतम, देवदत्त पडीक्कल, नीतिश राणा, ऋतुराज गायकवाड़ और चेतन सकारिया शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के पास अभी तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का अनुभव नहीं है।