एक तीर से यूं तो दो शिकार होना ही बड़ी बात मानी जाती है लेकिन जय शाह ने एक तीर से कई शिकार कर डाले हैं। सबसे पहले तो उन्होंने बीसीसीआई अध्यक्ष और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को ये बता दिया कि उनकी क्रिकेट की दूरदर्शिता किसी से कम नहीं है भले ही वो क्रिकेट ना खेलें हों।
दरअसल, पिछले कुछ सालों से जिस तरह टीम इंडिया आईसीसी की एक ट्रॉफी जीतने के लिए तरस रही है उसे देखते हुए धोनी के असाधारण अनुभव को फिर से भारतीय क्रिकेट में लाने की सोच तो गांगुली की होनी चाहिए थी क्योंकि उनसे बेहतर धोनी के योगदान को और कौन समझ सकता था। लेकिन, गांगुली हमेशा से ही धोनी के सबसे बड़े फैन नहीं रहें है। कई मौकों पर उन्होंने जिस तरह से विराट कोहली की कप्तानी का लोहा सार्वजिनक तौर पर माना उस तरीके से धोनी को वैसा सम्मान नहीं दिया। बावजूद इसके धोनी ने हर ट्रॉफी जीती है।
जय शाह ने धोनी की टीम इंडिया में फिर से एंट्री कराकर ये तय कर दिया कि क्रिकेट के फैसलों के मामले में सिर्फ कप्तान कोहली और रवि शास्त्री का एकमत ही नहीं चलेगा। क्योंकि बाकि सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ी तो इस जोड़ी के आगे कुछ कह ही नहीं पाते हैं। जय शाह इस बात को बखूबी जानते थे कि धोनी के नाम पर कोई भी चूं नहीं कर सकता। कोहली और शास्त्री भी नहीं जिन्होंने राहुल द्रविड़ को 2018 में बैटिंग सलाहकार और ज़हीर खान को गेंदबाज़ी कोच नियुक्त किए जाने के बाद पूरी तरह से ऐसे नजर अंदाज कर दिया कि उन दोनों दिग्गजों ने इंग्लैंड का दौरा ही टीम के साथ नहीं किया। द्रविड़ जैसे सम्मानित खिलाड़ी के साथ-साथ अनिल कुंबले का कोच के तौर पर क्या हश्र हुआ वो भी तो आप लोगों से छिपा नहीं है। ऐसे में अगर अपनी नम्रता और लचीले रुख से कोहली को कोई शांत कर सकता है, मुश्किल काम के लिए मनवा सकता है तो वो ‘धोनी भाई’ही हैं।
और सबसे आखिर में सबसे अहम बात ये कि जय शाह ने धोनी को इस भूमिका के लिए मनवाने के बाद भविष्य के लिए विकल्प के तौर पर ये भी देखने की कोशिश कर रहें है कि क्या धोनी को कोच की भूमिका के लिए भी तैयार किया जा सकता है? अगर कोच नहीं तो राहुल द्रविड़ की तरह अंडर 19 और ए टीम और एनसीए की ज़िम्मेदारी भविष्य में दी जा सकती है? या फिर डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट की भूमिका जो ज़हीर खान मुंबई इंडियंस के लिए निभा रहें हैं या फिर इंग्लैंड के लिए उनके पूर्व कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस निभा रहें हैं। क्या वैसा ही कुछ नया रोल धोनी को दिया जा सकता है? यानि धोनी का मेंटोर बनना सिर्फ एक मामूली घोषणा नहीं है बल्कि इसके दूरगामी नतीजे भारतीय क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत भी कर सकते हैं।