हमारे पास छोटे-छोटे रोबोटों से बनी एक आत्मा है, कोई भगवान नहीं है। इसे तार्किक ढंग से समझा जा सकता है। लेकिन लोग चाहते हैं कि स्वयं जीवन ही वास्तविक जादू हो। मैं लोगों को दिखाना चाहता हूं कि जीवन का जादू किस प्रकार विकसित हो रहा है। आपको चमत्कारों की जरूरत नहीं है। आपको इस दुनिया को वैसे ही समझने की जरूरत है, जैसी कि यह वास्तव में है। हम भाग्यशाली हैं कि जीवित हैं! लोग जादुई विकल्पों को छोड़ने के बारे में चिंता महसूस करते हैं। पर न समझ में आने वाली चीजों के बारे में मैं जितना समझता गया, मेरी चिंता उतनी ही कम होती गई। किसी भी चीज से अद्भुत वह मेरा भगवान है, जिसकी मैं कल्पना कर सकता हूं, लेकिन वह जादुई नहीं है।
मानव मन के भीतर नियंत्रण का सारा काम भावनाओं के जरिये होता है। आपके लैपटॉप में एक ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। उस अर्थ में हमारे मस्तिष्क में कोई ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है, सब भावनाओं की उथल-पुथल है। खुशी की बात है कि हमने यह सीख लिया है कि उन भावनाओं का कैसे उपयोग किया जाए।
जब आप गुस्से में होते हैं, तो एक तरह के शब्द का उपयोग करते हैं। जब आप खुश होते हैं, तो दूसरे तरह से शब्दों का उपयोग करते हैं। यह सब भावनाओं से नियंत्रित होता है। समाज भरोसे पर निर्भर है। पर अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के चलते विश्वास गंभीर रूप से खतरे में है। एआई समुदाय में बहुत लोग हैं, जो संभावनाओं को देखते हैं, पर जोखिम और जिम्मेदारी के बारे में नहीं सोचते। मैं उनसे कहूंगा कि रुकिए, आसानी से नकल तैयार करने वाला उपकरण बनाना अच्छी बात नहीं है, यह लोगों को इस तरह बदलेगा कि उनका भरोसा खत्म हो जाएगा।
(डेविड मार्चेस से बातचीत पर आधारित)