वेदव्यास, दरअसल, किसी व्यक्ति का नाम है ही नहीं! ‘वेदव्यास’,वास्तव में एक पद अथवा उपाधि है। वेदव्यास के पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति वेदव्यास कहलाता है, हालांकि उसका वास्तविक नाम कुछ और होता है।
वेदव्यास के पद पर बैठने वाले व्यक्ति का कार्य अत्यंत विशिष्ट होता है और उस कार्य के संपन्न हो जाने के उपरांत वह व्यक्ति वेदव्यास के पद से हट जाता है। फिर अगले कालखंड में उस पद पर किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति होती है। तब वह व्यक्ति अगला ‘वेदव्यास’ बनता है। अनेक युगों से वेदव्यास पद पर बैठने वाले लोग बदलते रहे हैं और इस तरह यह संख्या बढ़ते-बढ़ते आज अट्ठाईस तक जा पहुंची है। वर्तमान समय के वेदव्यास इसी दीघर्कालिक व्यास-परंपरा के 28वें सदस्य हैं।
व्यास पद पर बैठने वाले व्यक्ति का वास्तविक नाम कुछ और होता है। वर्तमान वेदव्यास का असली नाम कृष्ण द्वैपायन है। कहते हैं, द्वापर युग में महर्षि पराशर से निषाद-कन्या सत्यवती ने एक पुत्र को जन्म दिया। चूंकि उस बालक का जन्म एक द्वीप पर पैदा हुआ था और जन्म के समय उसका रंग सांवला (कृष्ण-वर्ण) था तो उसका नाम हुआ, कृष्ण द्वैपायन। यही बालक कृष्ण द्वैपायन, आगे चलकर 28वां वेदव्यास कहलाया।
वेदव्यास के पद में कौन-सी ऐसी विशेषता है कि इस पद पर अलग-अलग लोगों की नियुक्ति होती है? विष्णु पुराण के अनुसार, मनुष्य का बल और तेज इतना अल्प है कि उसके लिए वेदों को समझना संभव नहीं है। इसलिए प्रत्येक द्वापर युग में भगवान विष्णु स्वयं वेदव्यास के रूप में अंश अवतार लेते हैं और समस्त प्राणियों के हित के लिए वेदों का विभाजन करते हैं। भगवान, जिस रूप में इस बृहत कार्य को संपन्न करते हैं, उसी रूप का नाम वेदव्यास है।
द्रोण-पुत्र अश्वत्थामा होंगे 29वें वेदव्यास
सत, त्रेता, द्वापर और कलि ये चार युग हैं। ऐसे इकहत्तर चतुर्युग मिलने पर एक मन्वंतर बनता है। प्रत्येक मन्वंतर में 71 सत्युग, 71 त्रेता, 71 द्वापर और 71 कलियुग होते हैं। प्रत्येक द्वापर युग में वेदव्यास का जन्म होता है। एक मन्वंतर में 71 बार वेदव्यास की नियुक्ति होती है। वर्तमान मन्वंतर में 28 वेदव्यास हो चुके हैं और 43 वेदव्यास का जन्म होना अभी शेष है!
कृष्ण द्वैपायन से पहले हुए 27 वेदव्यास कौन थे? विष्णु पुराण में सभी 28 वेदव्यासों के नाम मिलते हैं जो निम्न प्रकार हैं: ब्रह्मा, प्रजापति, शुक्राचार्य, बृहस्पति, सूर्य, मृत्यु, इंद्र, वसिष्ठ, सारस्वत, त्रिधामा, त्रिशिख, भरद्वाज, अंतरिक्ष, वर्णी, त्रय्यारुण, धनंजय, ऋतुंजय, जय, भरद्वाज, गौतम, हर्यात्मा, वाजश्रवा, तृणबिंदु, ऋक्ष, वाल्मीकि, शक्ति, पराशर, जातुकर्ण, और अंत में कृष्ण द्वैपायन। इसी शृंखला में विष्णु पुराण कहता है कि अगले द्वापर युग के वेदव्यास, यानी 29वें वेदव्यास द्रोण-पुत्र अश्वत्थामा होंगे।