तो आइए टाइम मशीन में कुर्सी पकड़िए। चलते हैं इतिहास की यात्रा पर। सोशल मीडिया पर रातों-रात स्टार बन जाने वाले अनजान गुमनाम लोगों के दौर से पीछे जाते हुए मशहूर टाइम मैगजीन के मुखपृष्ठ पर एक तस्वीर देखकर आश्चर्य होगा। हम अब 1935 में हैं और आपके हाथ में है टाइम मैगजीन। इसके कवर पर अलेक्सी स्टैकनोव की तस्वीर है। अलेक्सी स्टैकनोव कोई नेता, अभिनेता, वैज्ञानिक या समाजसेवी नहीं हैं। तीस साल के स्टैकनोव रूस की एक कोयला खदान में मजदूर हैं।
कोयले के खनन में उनके एक चमत्कार ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। स्टैकनोव ने तीन लोगों की एक छोटी-सी टीम के साथ कोयला निकालने और उसे ऊपर तक ले जाने का तरीका बदला। और छह घंटे की शिफ्ट में 102 टन कोयले का उत्पादन कर दिया। स्टैकनोव हीरो हो गए। कम्युनिस्ट पार्टी को नया ब्रांड एंबेसडर मिल गया।
अब चलते हैं मास्को। दौर है 1936 का। यहां जोसेफ स्टालिन मजदूरों की एक बड़ी कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में आए मजदूरों को स्टैकनोवाइट्स कहा जा रहा है। यानी वे श्रमिक, जो अपनी मेहनत से खुश और सुखी हैं। स्टालिन कह रहे हैं, 'लाइफ हैज बिकम हैपियर कामरेड्स, लाइफ हैज बिकम हैपियर...' यही वह संदेश था, जिस पर संगीत व गीत बनाए गए। हालांकि बाद के दशकों में स्टालिन का यह संदेश व्यंग्य बन गया।
कम्युनिस्टों के स्टार मजदूर स्टैकनोव रूस और यूक्रेन के सीमावर्ती इलाके डोनबास से आते हैं, जिसे डोनेट्स रीजन कहा जाता है। इसका एक हिस्सा रूस में और दूसरा यूक्रेन के पास था, जिसे पुतिन के ताजा हमले ने स्वायत्त क्षेत्र में बदल दिया है। डोनबास यूक्रेन का सबसे विकसित शहरी इलाका है। 2014 में रूस से संघर्ष की शुरुआत से पहले यहां का समृद्ध कोयला और खनन उद्योग यूक्रेन की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत था।
इस सफर के लिए टाइम मशीन में बैठने से पहले आप भी खारकीव, डोनेस्क जैसे शहरों के नाम सुन चुके होंगे। मारियोपोल का बंदरगाह शहर, जिस पर रूस ने मौत बरसाई है, भी इसी समृद्ध कोयला और औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा है। टाइम मशीन अब तेजी से उड़ान भर कर 18वीं सदी के ब्रिटेन में आ गई है। यह ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति, नई फैक्टरियों और बढ़ते कामगारों का दौर है। अब आप वेल्स के मिथाइल टैडफिल शहर में हैं, जहां शुरुआती लोहा उद्योग विकसित हुआ था। यहां आपको जॉन ह्यूज के किस्से सुनने को मिलेंगे। वह एक लोहा मिल में इंजीनियर के बेटे थे। किस्मत और नसीहतों की चक्करदार सीढ़ियां चढ़ते हुए ह्यूज पहुंच गए मिलवाल आयरन ऐंड शिपबिल्डिंग वर्क्स, जो तब सबसे बड़ी लोहा कंपनी थी। ह्यूज को इस कंपनी का निदेशक बनाया गया और वह निकल पड़े कोयले की तलाश में।
टाइम मशीन में आपको दिखाई देगा कि 1869 में ह्यूज करीब आठ जहाजों पर साजो-सामान और मजदूरों के साथ यूक्रेन पहुंच गए हैं, जहां लोहा भी है और कोयला भी। डोनेट्स के इस वीरान इलाके में उद्योग नाम की चीज नहीं थी। ह्यूज ने यहां एक मेटलर्जिकल और रेल पटरी बनाने की फैक्टरी लगाई। काला सागर करीब ही था, जिससे तैयार माल ब्रिटेन पहुंचने लगा। यह बोल्शेविक युग से पहले की बात है, जब आपको दिखेगा कि जॉन ह्यूज रूस के औद्योगिकीकरण के प्रवर्तक बन गए हैं। डोनबास के इलाके में मजदूर जुटने लगे हैं। कोयला और लोहा उद्योग चमक रहा है। जॉन ह्यूज ने यहां एक शहर बसाया, जिसे युजकोवा नाम दिया गया था। इस शहर में मजदूरों को ब्रिटेन की तर्ज पर अच्छे अस्पताल, स्कूल आदि की सुविधाएं दी गईं।
टाइम मशीन अब आपको बोल्शेविक क्रांति के बीचों-बीच ले आई, जिसके असर से ह्यूज की कंपनी के विदेशी कर्मचारियों और मालिकों को देश छोड़ना पड़ा, लेकिन उद्योग फलता-फूलता रहा। युजकोवा शहर का नाम बदल कर सिटी स्टालिनो कर दिया गया। टाइम मैगजीन के कवर पर विराजने वाले मजदूर स्टैकनोव ने इस इलाके को दुनिया में मशहूर कर दिया। टाइम मशीन में स्टैकनोव का किस्सा सुनते हुए हम आ गए हैं 1985 मे। ठीक पहचाना आपने, ये मिखाइल गोर्बाचेव हैं, जो हैं रूस के पेरोस्त्रोइका यानी नए आर्थिक सुधार के प्रवर्तक। गोर्बाचेव ने ग्लासनोस्त और डेमोक्रैत्जिया के जरिये उदारीकरण और लोकतंत्र को बढ़ावा दिया था।
गोर्बाचेव के सुधारों के बीच इधर रूस के कोयला खनन इलाकों में हालत बिगड़ने लगे। 1958 के बाद से तेल व गैस पर निवेश बढ़ा, जिससे कोयला उद्योग पिछड़ने लगा। इस बीच सोवियत रूस की कुख्यात महंगाई मजदूरों का दम निकालने लगी। टाइम मशीन की खिड़की से आप देख सकते हैं, खदानों में दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। कोयला मजदूर अब हड़ताल पर हैं। पहली बड़ी हड़ताल 1989 में साइबेरिया के कुजबास इलाके में हुई। यह बगावत दो साल में डोनबास तक फैल गई।
यह क्या? कुछ दिखा आपको? कोयला मजदूरों को कौन संबोधित कर रहा है? जी हां, यह बोरिस येल्तसिन हैं। दरअसल, 1991 में यूक्रेन के डोनेट्स इलाके में एक खान में आग लगी। 31 मजदूर मारे गए। इसके बाद यह आंदोलन बुरी तरह भड़क उठा। रूस के ऊपर से उड़ते हुए आपको दिखेगा कि डोनेक्स से साइबेरिया तक करीब तीन लाख मजदूरों ने रूस की एक-तिहाई कोयला खदानंे बंद कर दी हैं। अब गोर्बाचेव को सुधार वापस लेने पड़े। येल्तसिन ने सोवियत रूस के गणतंत्र के साथ नए समझौते का दबाव बनाया। इस बीच सोवियत रूस बिखर गया। कम्युनिस्टों के गढ़ पूर्वी यूरोप का नक्शा ही बदल गया। वही कोयला, जो कभी स्टालिन की ताकत था, सोवियत रूस के विघटन की वजह बन गया। टाइम मशीन अब रूस-यूक्रेन युद्ध की तीसरी बरसी पर मास्को में उतर रही है। ऊर्जा स्रोतों के पावर हाउस और निर्यातक रूस से दुनिया का कारोबार बंद है। अर्थव्यवस्था अब केवल युद्ध के लिए उत्पादन के सहारे चल रही है। जल्द मिलेंगे, टाइम मशीन के अगले सफर पर...