मैंने पहली बार उनकी बत्तीसी देखी! मुझे आज तक याद नहीं, वह इससे पहले कब हंसे थे। उनकी दाढ़ें ‘लव जेहाद’ के घिसे-पिटे मुद्दे की तरह थीं, जो खाना चबाने में पूरी तरह अक्षम थीं। उनका ठहाका जबर्दस्त था, चीनी सेना तक पहुंचता, तो वह बिना फ्लैग मीटिंग के ही पीछे हट लेती! वह पहली बार खुलकर हंसे थे, इसलिए पूरा शहर स्तब्ध था। उनकी मातमी सूरत देखने को अभिशप्त शहरवासी उनके लिए ‘रेडकार्पेट’ तो नहीं बिछा पाए, लेकिन सड़क बनाने के लिए बिछी लाल रेत पर उन्हें खींच ले गए। ऐसी उन्मुक्त हंसी कभी-कभार देखी जाती है।
धीरे-धीरे पूरे शहर को पता चल गया कि उन्होंने पच्चीस साल पहले जो विवाह किया था, उसे तोड़ दिया। कोर्ट ने उनके तलाक को निपटा दिया। लोग हैरान थे, क्योंकि उनका जोड़ा कई बार आदर्श दंपति का पुरस्कार जीत चुका था! हैरानी इस बात पर भी थी कि उनका अलगाव उस दिन हुआ, जब देश में ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम लांच किया गया! वह बोले, यह शुभ दिन है। बच्चन जी की कविता है, नीड़ का निर्माण फिर-फिर। अब मुझे नई जिंदगी का निर्माण करना है। मैं भी तो इस इंडिया की एक इकाई हूं। कोर्ट ने आज मुझे ही आजाद नहीं किया, बल्कि मेरे एक विरोधी को भी सोलह साल पुरानी शादी से आजादी दे दी।
आज पूरा शहर उनकी और उनके विरोधी की बत्तीसी देखने के लिए उमड़ रहा है। देखना है, दोनों बंदे जिंदगी में अकेले कैसे ‘परफार्मेंस’ देते हैं। पत्नी के साथ मिलकर खिचड़ी बनाने वाले अब अपना पेट कैसे भरते हैं? साथ-साथ रहने की आदत जब हो जाती है, तब तलाक बहुत खटकता है। मगर साहब, इन दोनों का मसला आम आदमी के मसले से अलग है। दोनों ने जान-बूझकर तलाक लिया। दोनों की तलाकशुदा पत्नियां तलाक वाले कोटे से नौकरी के लिए अर्जी दे चुकी हैं। दोनों महानुभावों को उम्मीद है कि उनकी अलग हुई पत्नी सरकारी नौकरी प्राप्त कर लेंगी। और जब पत्नियों की नौकरी लग जाएगी, तो तलाकशुदा जोड़े पूर्ववत शादी कर लेंगे। इसे राजनीति नहीं, कूटनीति कहते हैं।