विलियम्स नाम के उस लड़के को स्कूल की फीस भरने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। जीविका के लिए भी वह फेरी लगाकर कुछ सामान बेचा करता। उस दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे भूख लगने लगी, जो धीरे-धीरे असह्य हो उठी।
उसने तय किया कि अब वह जिस घर भी जाएगा, वहां खाना मांग लेगा। उसने एक घर का दरवाजा खटखटाया, तो एक लड़की बाहर आई। उसे देखकर विलियम्स घबरा गया, और खाने के बजाय पानी मांग लिया।
लड़की ने भांप लिया कि वह भूखा है, इसलिए वह दूध से भरा एक बड़ा गिलास ले आई। लड़के ने दूध पी लिया। दूध पीने के बाद विलियम्स ने पैसों के बारे में पूछा। लड़की ने पूछा, पैसे किस बात के? आप चाहे यहां मेहमान की तरह आए हों या जरूरतमंद की तरह, दोनों ही स्थिति में पैसे लेना नहीं बनता। धन्यवाद देकर विलियम्स चला गया।
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वर्षों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ी। स्थानीय डॉक्टर सफल नहीं हुए, तो शहर के बड़े अस्पताल में उसे भेजा गया। विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने बुलाया गया। उन्होंने उस लड़की को देखा, और तय कर लिया कि उसकी जान बचनी ही चाहिए।
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उनकी मेहनत रंग लाई। लड़की की जान बच गई। डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस से लड़की के इलाज का बिल लिया। उस बिल के कोने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया। बिल देखकर लड़की को लगा कि बीमारी से वह बच गई, पर बिल से नहीं बचेगी।
उसने बिल खोला, देखा और फिर उसकी नजर बिल के कोने में पेन से लिखे नोट पर गई। उस पर लिखा था, एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चुका है। नीचे होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे।