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सबक: पाकिस्तान एफएटीएफ की निगरानी में, काम आ रहा है भारत का दबाव

हर्ष कक्कड़
Updated Thu, 22 Jul 2021 05:49 AM IST
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : PTI

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, 'हमारे कारण पाकिस्तान एफएटीएफ की निगरानी में है, और उसे ग्रे सूची में रखा गया है। हम पाकिस्तान पर दबाव बनाने में सफल रहे हैं और तथ्य यह कि पाकिस्तान का रवैया बदल गया है, क्योंकि भारत ने विभिन्न उपायों के जरिये दबाव बनाया है। यही नहीं, भारत के प्रयासों के कारण संयुक्त राष्ट्र के जरिये लश्कर-ए तैयबा और जैश प्रतिबंधों के दायरे में आ गए हैं।' पाकिस्तान 2018 से ग्रे लिस्ट में बना हुआ है। इसने वैश्विक वित्तीय संस्थानों से उसकी उधार लेने की क्षमता को सीमित कर दिया है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।



पाकिस्तानी नेतृत्व ने इस बयान की आड़ लेकर दावा किया कि भारत एफएटीएफ को प्रभावित कर रहा है। उसके विदेश कार्यालय ने ट्वीट किया, 'पाकिस्तान हमेशा से एफएटीएफ के राजनीतिकरण और भारत द्वारा उसकी प्रक्रियाओं को कमजोर करने का खुलासा करता रहा है। भारतीय विदेश मंत्री का हालिया बयान पाकिस्तान के खिलाफ अपने राजनीतिक मंसूबों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच का उपयोग करने के भारत के निरंतर प्रयासों की पुष्टि करता है।' इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री, एसएम कुरैशी ने कहा था कि पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बने रहने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि उसने 27 में से 26 बिंदुओं को पूरा कर लिया था, जिसे पूरा करने के लिए कहा गया था। उन्होंने यह भी ट्वीट किया, 'पाकिस्तान ने लगातार कहा है कि भारत ने एफएटीएफ का राजनीतिकरण किया है।' 


पाकिस्तान भले ही भारत पर एफएटीएफ के राजनीतिकरण का आरोप लगाता है, लेकिन सच यह है कि हर देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम करता है। पाकिस्तान ने भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी समूहों का समर्थन किया और बदले में भारत ने कई वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए काम किया, इनमें एफएटीएफ सिर्फ एक था, इसके अलावा भारत ने बालाकोट में उसके शिविर को निशाना बनाया। पाकिस्तान द्वारा वैश्विक मानदंडों का पालन नहीं करने के मुद्दे को नियमित रूप से उठाकर भारत ने दुनिया के सामने साबित कर दिया कि पाकिस्तान का एफएटीएफ की शर्तों का पालन करने का कोई इरादा नहीं है। 


पाक मीडिया के मुताबिक जोहर टाउन धमाके में हाफिज सईद को निशाना बनाया गया था। हालांकि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, हाफिज के जेल में होने की आशंका थी। धमाके और पाक हस्तियों के बयानों से संकेत मिलता है कि पाकिस्तान का एफएटीएफ के निर्देशों का पालन करने और विश्व स्तर पर नामित आतंकवादियों को उनके कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराने का कोई इरादा नहीं है। तथ्य यह है कि वह अपने आवास में छिपा है, यानी पाकिस्तान एफएटीएफ से झूठ बोल रहा है। 


दशकों तक पाकिस्तान ने तालिबान को अपनी धरती पर पनाह दी, उन्हें हर तरह का समर्थन दिया, जबकि वैश्विक स्तर पर इससे इन्कार करता रहा। दूसरी तरफ, उसने भारत पर पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी समूहों के समर्थन का आरोप लगाया। पिछले हफ्ते एक बयान में, तालिबान ने पाकिस्तान सरकार से पाकिस्तान तालिबान के साथ बातचीत करने का आग्रह किया, क्योंकि वह अफगानिस्तान में मजबूती से जमा हुआ है। यह पाकिस्तान के उस दावे को झूठा साबित करता है कि भारत पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी समूहों का समर्थन करता है।


पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीतियों के कारण एक राष्ट्र के रूप में अफगानिस्तान को भारी नुकसान हुआ। पाकिस्तान जैसे दुष्ट देशों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए वैश्विक मंचों पर अपनी बात रखने की अफगानिस्तान के पास ताकत नहीं थी। भारत सहित बाकी दुनिया ने वैश्विक संस्थाओं को पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रेरित किया, जिससे उसे अपनी नीचतापूर्ण नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा। यानी अकेले भारत ने नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की। दूसरी बात, जिसे पाकिस्तान भूल जाता है कि ग्रे लिस्ट में उसका रहना एजेंडा बिंदुओं को पूरा करने के कारण नहीं, बल्कि अधूरे एजेंडा बिंदुओं के महत्व के कारण है। 


एक प्रमुख कारण, जिसे पाकिस्तान ने अभी तक पूरा नहीं किया है, वह आतंकवादी समूहों और उनके सरगनाओं के खिलाफ निर्णायक रूप से कार्रवाई है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकी भी शामिल हैं। ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान के बने रहने को सही ठहराते हुए एफएटीएफ ने जो बयान जारी किया है, उसमें साफ है कि डेनियल पर्ल की हत्या के आरोपी उमर सईद शेख को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने मुक्त कर दिया। इसी तरह पाकिस्तान ने मसूद अजहर, हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। पाकिस्तान ने उन्हें आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए दंडित किया है, लेकिन आतंकवाद के लिए नहीं, जिसकी दुनिया भर से मांग हो रही है।
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस से जब कुरैशी के उस बयान पर सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत एफएटीएफ को प्रभावित कर रहा है, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका 'पाकिस्तान को एफएटीएफ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा, ताकि आतंकवाद के वित्तपोषण, जांच और अभियोजन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकी समूहों के सरगनाओं और कमांडरों को लक्षित करके शेष कार्रवाई को तेजी से पूरा किया जा सके।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार प्रतिबंधित आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे वह बचने का प्रयास करता है। 


आतंकवादी समूहों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई किए बिना पाकिस्तान एफएटीएफ के चंगुल से बाहर निकलने के लिए हर तरह का प्रयास करता है, क्योंकि उन्हें पाक सेना और आईएसआई द्वारा पोषित किया गया है। ये आतंकी सरगना पाकिस्तान के लिए संपत्ति हैं और अगर यह उनके खिलाफ कार्रवाई करता है, तो वे संभवतः पाकिस्तान को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए भारत पर आरोप लगाकर वह एफएटीएफ को बरगलाना और इसकी अनिवार्य शर्तों को पूरा किए बिना ग्रे लिस्ट से बाहर आना चाह रहा है। लेकिन उसे इसकी अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। पाकिस्तान ने आतंकी समूहों का समर्थन किया और अब उसे इसकी कीमत चुकानी ही होगी।

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