पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने भले 44 साल बाद ही सही, लेकिन मान लिया कि जुल्फिकार अली भुट्टो को दी गई फांसी में उचित न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ था। लेकिन सेना की जिस तानाशाही की वजह से ऐसा हुआ, वह आज भी पाकिस्तान की राजनीति पर हावी है।