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अर्थव्यवस्था: बढ़ रहे हैं नए तरह के रोजगार, गिग और डिजिटल इकनॉमी से खुल सकती हैं और राहें

जयंतीलाल भंडारी
Updated Wed, 25 Oct 2023 07:02 AM IST

सार

गिग इकनॉमी और डिजिटल इकनॉमी में देश के युवाओं के सुनहरे भविष्य के लिए कुछ विशेष कौशलों की ओर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
 
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सांकेतिक - फोटो : PTI


गिग इकनॉमी एक ऐसा श्रम बाजार है, जिसकी खासियत अल्पकालीन और स्वतंत्र कार्य व्यवस्था है। हाल ही में रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष ग्रामीण और शहरी, दोनों स्तरों पर बेरोजगारी दर में कमी आई है। घरेलू मांग में लगातार मजबूती की बदौलत पिछले 10 महीनों से रोजगार का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 50 से ऊपर चल रहा है, जिसका मतलब है कि रोजगार में सकारात्मक बढ़ोतरी हो रही है।


संकेतकों के मुताबिक, आगामी महीनों में रोजगार में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि देश में सरकारी क्षेत्र की नौकरियों में कमी आ रही है, लेकिन हुनर और डिजिटल कौशल पर आधारित नए दौर के रोजगार के मौके तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले छह वर्षों में बेरोजगारी दर छह फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी पर आ गई है। निश्चित रूप से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटाने में मनरेगा की अहम भूमिका है, वहीं शहरी क्षेत्र में इसके लिए कौशल विकास और डिजिटल स्किल्स की अहम भूमिका रही है। देश में शहरी बेरोजगारी दर चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 6.6 फीसदी दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में यह 12.6 फीसदी दर्ज की गई थी।


कोरोना काल के बाद शहरी क्षेत्रों में गिग इकनॉमी में रोजगार तेजी से बढ़ा है, कौशल और डिजिटल विकास की योजनाओं से युवाओं के लिए रोजगार के मौके भी बढ़े हैं। व्यापक तौर पर डिजिटलीकरण के प्रसार ने गिग अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। निश्चित रूप से देश में शहरी रोजगार के मद्देनजर गिग कर्मियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। कुछ भर्ती एजेंसियों की रिपोर्टों के मुताबिक, जहां पिछले वर्ष सितंबर से दिसंबर के त्योहारी सीजन में करीब चार लाख गिग नौकरियां सृजित की गई थीं, इस साल वैसी नौकरियों की संख्या सात लाख तक पहुंचने की उम्मीद है।


गिग इकनॉमी में रोजगार के मौके बढ़ने के बारे में नीति आयोग के आंकड़े भी गौरतलब हैं, जिसके मुताबिक, देश में करीब 44 करोड़ लोगों का श्रम बल है, जिसमें 77 लाख गिग कर्मी हैं, जिनकी संख्या 2030 तक बढ़कर 2.3 करोड़ के करीब होने की उम्मीद है। वहीं मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट द्वारा वैश्विक रोजगार रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था में वर्ष 2025 तक ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते करीब साढ़े छह करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं, वहीं इसके चलते करीब साढ़े चार करोड़ परंपरागत नौकरियां समाप्त हो सकती हैं।


ऐसे में, डिजिटलीकरण से करीब दो करोड़ से अधिक नई नौकरियां निर्मित होंगी। निश्चित रूप से डिजिटल हुनर से लैस भारत की नई पीढ़ी के लिए अच्छे रोजगार के मौके देश के साथ-साथ दुनिया के विभिन्न देशों में तकनीक व नवाचार के इस्तेमाल के कारण बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में, गिग इकनॉमी और डिजिटल इकनॉमी में देश के युवाओं के सुनहरे भविष्य के लिए कुछ विशेष कौशल की ओर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। नई पीढ़ी को अच्छी अंग्रेजी, कंप्यूटर-आईटी दक्षता, कोडिंग का हुनर, संचार कौशल, वेब डिजाइन, कौशल बाजार अनुसंधान, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, डाटा साइंस जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों से भी सुसज्जित किया जाना चाहिए।


अब देश में स्किल इंडिया डिजिटल से कौशल, शिक्षा और उद्यमशीलता के लिए सार्वजनिक डिजिटल संरचना का पूरा लाभ लेते हुए नई पीढ़ी के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर निर्मित किए जाने चाहिए। साथ ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के जरिये देश के युवाओं को तकनीक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कौशल व प्रशिक्षण से लैस करके रोजगार की डगर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। 

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