पिछले दिनों दलित कवि मलखान सिंह का कैंसर से निधन हो गया। वह अलीगढ़ जनपद के वसई काजी गांव में पैदा हुए थे। हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण दलित लेखक कैंसर से ग्रसित हो असमय ही दिवंगत हो गए, जिनमें ओमप्रकाश वाल्मीकि और डॉ. धर्मवीर प्रमुख हैं। प्राणघातक बीमारियों की चपेट में आकर तुलसी राम, डॉ. तेजसिंह, रजनी तिलक और मूलचंद सोनकर जैसे रचनाकार भी चले गए।
कवि मलखान सिंह 'सुनो ब्राह्मण' कविता से चर्चा में आए थे। उनके कवित्व निर्माण की पृष्ठभूमि पर गौर करें, तो कई विचारणीय पक्ष सामने आएंगे। यह तथ्य है कि अमेरिकी-अफ्रीकी अश्वेत कवियों को आगे लाने में समता पसंद श्वेत संपादकों ने बाहर से बहुत महत्वपूर्ण सहयोग किया था, जबकि उन अश्वेत कवियों ने अंदर से अभिव्यक्ति के अपने माध्यम विकसित किए थे। दलित कवि मलखान सिंह का सच भी यही है।