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लव गुरु की तलाश में

Thu, 14 Feb 2013 12:11 AM IST
पूरन सरमा
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यह तो सुना था कि गुरु बिन ज्ञान कहां। लेकिन मुझे इसका एहसास नहीं था। मुझे लग रहा था कि प्रेम में बिना गुरु बनाए मैं सफल नहीं हो सकता। लव गुरु की तलाश में मैं निकला, तो प्रेम प्रबंधन में माहिर छोटे-मोटे लोग तो मिल गए, लेकिन मुझे पहुंचे और घुटे हुए लव गुरु की तलाश थी।
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फिर किसी ने बताया कि विश्वविद्यालय के किसी प्रोफेसर से मिलो। मैं विश्वविद्यालय के हिंदी डिपार्टमेंट में गया, तो वह खाली पड़ा था। वहां एक अधेड़ से व्यक्ति स्टाफ रूम में आंख बंद किए मनन कर रहे थे। मैंने कहा, गुरुदेव नमस्कार। उनकी तंद्रा एकदम टूटी और फिर वह थोड़ा सहज होकर बोले, आपका परिचय? मैं बोला, मैं इसी शहर का रहने वाला हूं। आज वेलेंटाइन डे है और मुझे लव गुरु की तलाश है। क्या आप मेरा लव गुरु बनना पसंद करेंगे?

मेरी बात पर वह थोड़ी कृपणता से हंसे और बोले, पहले अपना नाम-परिचय तो दीजिए। मैंने कहा, मैं शर्मा हूं। शादीशुदा हूं। दांपत्य जीवन में रस नहीं है। सुना है, बिना गुरु ज्ञान लिए प्रेम का सूत्रपात नहीं हो पाता। मैं समझ गया शर्मा जी। लेकिन मैं आपकी कोई मदद नहीं कर पाऊंगा। वैसे मैं खुद रससिद्ध हूं, बिहारी भी मैं ही पढ़ाता हूं। पर आप देख रहे होंगे, सारा डिपार्टमेंट चला गया और मैं अकेला पड़ा हुआ हूं। गृह कलह से परेशान मैं खुद आप की तरह निराशा के अंधेरे में भटक रहा हूं। आप ऐसा करिए, हमारे विभाग के एक पारंगत लव गुरु हैं, उन्हें इसी आसक्ति भाव के कारण निलंबित किया गया है, उनसे मिल लीजिए।
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मैंने कहा, धन्यवाद। बस इतना जरूर याद रखें कि गुरुजी जूते न पड़वा दें। वह बोले, घबराने की बात नहीं है। वह खुद कई बार पिट-पिटाकर ही लव गुरु का दर्जा ले सके हैं। कुछ दिन बतौर सावधानी के हेलमेट जरूर पहनकर रहना। मैं पता लेकर लव गुरु के निवास पर पहुंचा, तो वहां लंबी लाइन लगी हुई थी।

मैंने जानकारी ली, तो पता चला कि वेलेंटाइन डे पर उनसे गुरु ज्ञान लेने वालों की वहां भीड़ थी। मैंने अंदाज लगा लिया कि अगले सात दिन तक लव गुरु से मिलना संभव नहीं। इतने में तो वेलेंटाइन डे निकल जाएगा और प्रेम के प्यासे मेरे अधर सूखे ही रह जाएंगे। मुझे लगा कि मेरे भाग्य में अभी लव गुरु का योग नहीं है। मैं घर जाने के बजाय पार्क में जाकर लेट गया। प्रेम प्रबंधन में विफल रहने का अफसोस कम न था। पर गुरु बिन ज्ञान कहां!
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