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बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ, उन्हें मुजीब की प्रतिमा भी नहीं चाहिए

सुबीर भौमिक Published by: सुबीर भौमिक Updated Sat, 28 Nov 2020 05:30 AM IST
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बांग्लादेश

बांग्लादेश में कट्टर इस्लामिक समूहों ने देश के संस्थापक 'बंगबंधु' शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमा लगाने के खिलाफ आंदोलन चलाया है, जिसके कारण देश की सत्ताधारी अवामी लीग और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के बीच टकराव पैदा हो गया है। प्रतिमा को राजधानी ढाका के दक्षिणी उपनगर धोलाइपार में स्थापित किया जाना है। इस्लामवादी समूहों का कहना है कि मूर्तियों को स्थापित करना 'गैर-इस्लामी' है। ताकतवर इस्लामिक समूह हिफाजत-ए इस्लाम, जो पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश में ईशनिंदा कानून पर जोर देता है, द्वारा देश भर में की गई फ्रांस-विरोधी रैली के तुरंत बाद मुजीब की प्रतिमा के खिलाफ यह आंदोलन शुरू हुआ है। 



दिग्गज बांग्लादेश विशेषज्ञ सुखोरंजन दासगुप्ता कहते हैं, 'यह वास्तव में विडंबना है कि यह आंदोलन मुजीब की जन्म शताब्दी वर्ष में हो रहा है और बांग्लादेश ने एक वर्ष पूर्व इस्लामिक पाकिस्तान से अपनी आजादी की स्वर्ण जयंती मनाई है।' उनकी बेस्टसेलर  पुस्तक मिडनाइट मैसेकर में 1975 के सैन्य तख्तापलट का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसके कारण मुजीबुर रहमान की उनके परिवार के साथ हत्या हुई थी। उनकी दो बेटियां तख्तापलट का निशाना बनने से बच गई थीं, जिनमें से एक शेख हसीना अभी देश की प्रधानमंत्री हैं। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय, जो अपनी मां के इन्फोटेक सलाहकार हैं, ने हाल ही में अपने सत्यापित फेसबुक पेज में पोस्ट किया कि बांग्लादेश '1971 के मुक्ति युद्ध के मूल्यों से दूर नहीं जाएगा, जो धर्मनिरपेक्ष, भाषायी बंगाली राष्ट्रवाद पर आधारित हैं।' 


बांग्लादेश के सूचना मंत्री हसन महमूद ने इस्लामवादियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे मुजीब की प्रतिमा को स्कल्पचर (मूर्तिकला) का काम मानें, मूर्ति नहीं। उन्होंने हाल ही में मीडिया को बताया कि समस्या तब शुरू होती है, जब कोई इन दोनों में फर्क नहीं कर पाता है। पुलिस ने अब तक इस्लामवादी आंदोलन को नियंत्रित किया है, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन और आगजनी हुई। लेकिन अब जबकि अवामी लीग सरकार के दो मंत्रियों ने कट्टरपंथियों को प्रतिमा लगाने की धमकी दी है, नए टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। मुक्तियुद्ध मामलों के मंत्री ए के मुज्जमल हक ने कहा, 'हम न केवल धोलाइपार में अपने प्रिय नेता की प्रतिमा लगाएंगे, बल्कि ढाका में सुहरावर्दी उद्यान में भी एक मूर्ति की स्थापना करेंगे। देखते हैं कि हमें कौन रोकता है।'


बांग्लादेश इस वर्ष मुजीबुर रहमान के जन्म शताब्दी का जश्न मना रहा है, जिन्होंने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश का आह्वान किया था। सुहरावर्दी उद्यान में ही मुजीबुर रहमान ने बांग्लादेश की आजादी की घोषणा की थी। उप शिक्षा मंत्री महिबुल आलम चौधरी नौफेल ने इस्लामवादियों को धमकी देते हुए कहा, 'जो भी अपनी सीमा पार करने की कोशिश करेगा, उसकी गर्दन तोड़ दी जाएगी।' अवामी लीग समर्थक फेसबुक पेज ने मुजीब की प्रतिमा के समर्थन में सोशल मीडिया अभियान चलाया है, जो तुर्की से लेकर पाकिस्तान तक मस्जिदों के सामने लगी प्रतिमाओं की तरफ इशारा करता है। लेकिन अवामी लीग के एक दशक सत्ता में रहने के बावजूद मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में इस्लामवादी कट्टरता बढ़ रही है। एक इस्लामी कट्टरपंथी को हाल ही में बांग्लादेश के एक लोकप्रिय क्रिकेट खिलाड़ी शाकिब अल हसन को मौत की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 


उसने आरोप लगाया था कि शाकिब ने कोलकाता में काली पूजा का उद्धाटन किया, जहां वह कोलकाता नाइट राईडर्स की तरफ से खेलने गए थे। अवामी लीग के शासन के पिछले एक दशक में इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों में कई धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर, प्रकाशक, लोक कलाकार, लेखक और बुद्धिजीवी मारे गए हैं या घायल हुए हैं, जो बड़े पैमाने पर धर्मनिरपेक्ष देश में इस्लामवादी खतरे को रेखांकित करता है, जहां कई मुसलमान अपनी बंगाली भाषा और संस्कृति पर बहुत गर्व करते हैं।


पूर्व अभिनेत्री और वकील तथा शेख हसीना सरकार में कनिष्ठ सूचना मंत्री तराना हलीम कहती हैं, 'पाकिस्तान के समय से ही इन इस्लामवादियों ने हमारी धर्मनिरपेक्ष संस्कृति के प्रतीकों पर हमला किया है। यह लंबे समय से चल रही वैचारिक लड़ाई है, जिसमें हमारे घरों में जन्मे कट्टरपंथियों को पाकिस्तान जैसे देशों के आतंकी समूह और खुफिया एजेंसी से समर्थन मिलता है और जिन्होंने 1971 के नुकसान को भुला दिया है।' हैरानी नहीं कि मुजीब प्रतिमा पर अवामी लीग समर्थकों के साथ-साथ पुलिस की कार्रवाई और संभावित टकराव की धमकी से इस्लामवादी वाकिफ हैं। बांग्लादेश इस्लामी आंदोलन के सर्वोच्च नेता रेजाउल करीम ने पत्रकारों से कहा कि इस्लाम में प्रतिमा अस्वीकार्य है। इसलिए हम धोलाइपार में मुजीब की प्रतिमा लगाने का विरोध करेंगे। कुछ इस्लामी नेताओं ने यहां तक कहा कि अवामी लीग 'शरीयत के सिद्धांतों के खिलाफ कार्य नहीं करने' के अपने वादे से मुकर रही है।


कुछ इस्लामवादी समूह कोलकाता के एक कॉलेज में मुजीब की प्रतिमा हटाना चाहते थे, जहां उन्होंने अपने कॉलेज के दिन बिताए थे, वे इसे प्रमुख मुस्लिम संस्थान में अनुचित बताते थे। लेकिन मोदी सरकार ने इसे अनसुना कर दिया और पश्चिम बंगाल सरकार को संभावित आंदोलन से दृढ़ता से निपटने के लिए कहा, जो इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों की सीमापार उपस्थिति का संकेत था। बांग्लादेश में इससे पहले भी मुजीब की प्रतिमा लगी हैं। सुखोरंजन दासगुप्ता कहते हैं, 'दो चुनावों में लगातार विफल रहने के बाद इस्लामवादी समूह सत्तारूढ़ अवामी लीग के खिलाफ इस मुद्दे को उठा रहे हैं।' कभी अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर द्वारा गरीब बताए जाने वाले बांग्लादेश ने पिछले दशक में कई सामाजिक विकास संकेतकों में तेजी से उपलब्धि हासिल की, जिसमें नवजात एवं बाल मृत्युदर, शैक्षणिक लैंगिक असमानता शामिल है और इस वर्ष उसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से ज्यादा हो गई है। तराना हलीम कहती हैं कि ऐसा इसलिए संभव हो पाया है, क्योंकि बांग्लादेश धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र पर आधारित है, लेकिन इस्लामवादी कट्टरपंथी इसे पाकिस्तान के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं, जो किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा।

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