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मौका मिला है तो वर्तमान को सुधारें और भविष्य को संवारें

अचिंत कौर
Updated Sat, 02 May 2020 12:40 AM IST
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI

अगर आप रचनात्मक हैं, तो खाली समय कोई नहीं होता है। जब आप घर में होते हैं, तो वहां भी करने के लिए बहुत काम होता है। मेरे घर में मेरी मां हैं, बेटे हैं, उनके लिए क्या खाना बनाना है, घर की साफ-सफाई है, पौधों की देखभाल है, कुत्तों के साथ खेलना है- ये सारे काम निपटाते हुए कैसे दिन बीत जाता है, पता ही नहीं लगता। हम नियमित जिम जाने वाले लोग हैं। अब घर में इतने उपकरण हैं नहीं, तो पहले पढ़ाई करती हूं, फिर सीखती हूं और तब अगले दिन उसे करती हूं। मैं नियमित डेढ़ घंटे व्यायाम करती हूं।



बीच-बीच में कोई वेब सीरीज देख लेती हूं। लॉकडाउन से पहले मेरे कुछ शूट शुरू होने वाले थे, उनकी स्क्रिप्ट पढ़ रही हूं। कुल मिलाकर इतना काम है कि पूरे लॉकडाउन के दौरान मैं सिर्फ दो दिन घर से निकली हूं। मुझे फिल्में देखना बहुत पसंद है। मैं किसी खास ऐक्टर-ऐक्ट्रेस को देखकर फिल्म नहीं देखती, बल्कि कहानी जानकर फिल्म देखती हूं। इस लिहाज से मुझे पुरानी फिल्में ज्यादा अच्छी लगती हैं। इसके अलावा मुझे रोमांटिक गीत बहुत पसंद हैं। मैंने ढेर सारी आत्मकथाएं और जीवनियां पढ़ी हैं।


आजकल मैं डाइट समझने की कोशिश कर रही हूं, तो उसके बारे में पढ़ाई कर रही हूं। साथ ही मैं ध्यान लगाती हूं, तो सबसे ज्यादा पढ़ाई मेडिटेशन के विषय में कर रही हूं। लॉकडाउन की वजह से इस समय हर जगह एक मायूसी का माहौल है, लेकिन इससे निकलने के लिए ऊर्जा भी आपको अपने भीतर से ही मिलेगी। वैसे तो जब भी आपके जीवन में मायूसी का दौर आता है, तो कुछ दोस्त आपको मानसिक और भावनात्मक रूप से सहारा देते हैं, लेकिन मेरे जीवन का अनुभव यह कहता है कि यह सब मन का खेल है, यानी वास्तविक ऊर्जा आपको अपने अंदर से ही मिलती है।


लॉकडाउन होते ही मेरे शूट बंद हो गए, मनी फंडिंग रुक गई। इससे मेरे सारे काम रुक गए, मैं डिप्रेशन में आ गई। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं! तब मैंने सोचा कि शूट के लिए मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहना बहुत जरूरी है। मौका मिला है, तो मुझे अपनी डाइट पर काम करना चाहिए। संकट के समय में आपके पास दो ही विकल्प होते हैं- एक, आप खुद को कोसते रहें कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? हालांकि इससे भी सीख मिलती है, लेकिन आपको यह समझ होनी चाहिए कि आप उसके आदी न हो जाएं।


दूसरे, आप अतीत से शिक्षा लेकर वर्तमान को सुधारें और भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। जब आपको पूर्णता का एहसास होने लगता है, तो आप वही बाहर भी वाइब्रेट करते हैं और फिर वही एनर्जी रिफ्लेक्ट होकर सब कुछ ठीक करती है। सबकी पसंद अलग-अलग होती है। जो मेरी पसंद है, वह आपकी नहीं हो सकती। इसलिए आपका मन जो कहता है, आपके अंदर से जो आवाज आती है, उसे करें और खुद को खुश रखें। अभी मौका मिला है, जिंदगी की आपाधापी दोबारा शुरू होगी, तो आपको कोई मौका नहीं मिलेगा।


यह समय आत्मचिंतन और आत्ममंथन का है, इसलिए खुद को जानें और अपने साथ दूसरों को भी खुश करें। आपमें हमेशा ऊर्जा बनी रहे, इसके लिए आपको कोई न कोई उद्देश्य ढूंढना होगा। अगर आप घर में खाना बनाएंगे और वह स्वादिष्ट लगेगा, तो आपको खुशी मिलेगी। अगर रोज कसरत करेंगे और अपने शरीर में बदलाव देखेंगे, तो आपका दिल खुश होगा। इसलिए रोजाना एक उद्देश्य निर्धारित करें और फिर उसे प्राप्त करने के लिए जुट जाएं। उसके बाद जो नतीजे सामने आएंगे, उनमें आपको तरक्की नजर आएगी, क्योंकि वे सकारात्मक होंगे और उनसे आपको खुशी का एहसास होगा। (लेखिका चर्चित अभिनेत्री हैं।)

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