2025 तक यह आंकड़ा 12 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि समय रहते इसका इलाज संभव है, लेकिन जरा-सी लापरवाही और जागरूकता की कमी पर यह इंसान को मौत के मुंह में धकेल देता है। हालांकि वैश्विक स्तर पर प्रति वर्ष चार फरवरी को विश्व कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है, लेकिन भारत में इसे नोबेल पुरस्कार विजेता मैडम क्यूरी के जन्मदिन सात नवंबर को मनाया जाता है।
वर्ष 2022-2024 में कैंसर का थीम 'क्लोज द केयर गैप' रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कैंसर मौत का दूसरा प्रमुख कारण है। भारत में हर साल लोगों को मुफ्त कैंसर जांच के लिए केंद्र से लेकर नगरपालिका के अस्पतालों तक में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वहां पहुंचकर वे अपनी प्रारंभिक जांच करा सकें।
अगर कोई लक्षण पाया जाता है, तो तुरंत जांच कराने की सलाह दी जाती है, ताकि रोगी शीघ्र उपचार करवा कर रोगमुक्त हो सके। कैंसर शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। फेफड़े, प्रोस्टेट, पेट एवं यकृत का कैंसर पुरुषों में सबसे आम है, जबकि स्तन या थायराइड का कैंसर महिलाओं में सबसे आम है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में भी कैंसर रोगियों की संख्या देखी जा सकती है।
कुछ माह पहले जम्मू कश्मीर के सांबा जिले के आयुक्त कार्यालय में कैंसर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया था। इसका उद्देश्य आशा वर्करों को कैंसर से जुड़े लक्षणों से परिचित कराना था, ताकि वे ग्रामीण महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर की पहचान कर संबंधित महिला को इलाज के लिए प्रेरित कर सकें। केंद्र सरकार की ओर से कठुआ जिले में टाटा मेमोरियल कैंसर संस्था की शाखा स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस क्षेत्र के कैंसर मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर भटकना न पड़े।
जम्मू-कश्मीर में भी कैंसर के मरीजों की संख्या कुछ कम नहीं है। वर्ष 2018 से 2020 तक की रिपोर्ट के अनुसार, 21 हजार से अधिक लोगों की कैंसर से मृत्यु हुई है। यह आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से कैंसर पीड़ितों के बेहतर इलाज के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, जिनमें किसी भी कैंसर संस्थान में इलाज के लिए मुफ्त रेल यात्रा भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त आयुष्मान योजना के तहत भी कैंसर पीड़ित को इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग लाभ नहीं उठा पाते हैं। चार वर्ष पूर्व कैंसर के कारण अपने पिता को खो चुके डीडी न्यूज, दिल्ली में कार्यरत शम्स तमन्ना कहते हैं कि शुरुआत में कई लक्षणों को सामान्य बीमारी समझ कर नजर अंदाज करना ही उनके पिता की मृत्यु का कारण बना था।
वह कहते हैं कि कैंसर के इलाज के लिए सरकार की ओर से बहुत-सी सुविधाएं हैं। कई गैर सरकारी संस्थाएं भी इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। लेकिन यह एक आम आदमी की जानकारी से बाहर है। ऐसे में सरकार और इन संस्थाओं का कर्तव्य बनता है कि वे वर्ष भर जन जागरूकता अभियान चलाएं और हर सप्ताह स्वास्थ्य शिविरों में लोगों के स्वास्थ्य की जांच करें।
केवल योजनाएं बनाना समाधान नहीं है, बल्कि आम लोगों तक इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना जरूरी है। जागरूकता से ही देश को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त कराया जा सकता है। जागरूकता बढ़ाने से ही पोलियो, हैजा और चेचक पर काबू पाया जा सका है। (चरखा फीचर)