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द कन्वर्सेशन: मलबे के तेरह करोड़ टुकड़ों का यह है गूगल कनेक्शन

सारा वेब/ब्रेट कार्टर/क्रिस्टोफर फ्लूक Published by: यशोधन शर्मा Updated Sun, 24 Mar 2024 07:46 AM IST

सार

जिस उपग्रह की मदद से गूगल आपको रास्ता बता रहा है, कभी सोचा है कि अंतरिक्ष में घूम रहे 13 करोड़ पिंडों के बीच वह खुद को कैसे बचाए है? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay


इकोस्टार-7 पर जुर्माना अमेरिका का पहला मामला हो सकता है, लेकिन संभवतः आखिरी नहीं होगा। हम अंतरिक्ष उपयोग के एक ऐसे अभूतपूर्व युग में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें संभावना है कि इस दशक के अंत तक अंतरिक्ष में सक्रिय उपग्रहों की संख्या 700 फीसदी तक बढ़ जाएगी। जैसे-जैसे अंतरिक्ष में भीड़ बढ़ती जाएगी, हजारों उपग्रहों एवं कबाड़ के टुकड़ों पर नजर रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।


मनुष्य 1957 से अंतरिक्ष में उपग्रह भेज रहा है और वर्तमान में पृथ्वी के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में 8,700 से अधिक उपग्रह सक्रिय हैं। उपग्रह अमूमन पृथ्वी की तीन प्रमुख कक्षाओं में होते हैं। सबसे आम पृथ्वी की निचली कक्षा है, जिसमें कम से कम 5,900 सक्रिय उपग्रह हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भी पृथ्वी की निचली कक्षा में है, जो हर दिन 16 बार पृथ्वी का चक्कर लगाता है। ऊपरी मध्यम पृथ्वी कक्षा उतनी व्यस्त तो नहीं है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण उपग्रहों का घर है-वह हमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम या जीपीएस प्रदान करती है। जियो-सिंक्रोनस (भू-स्थैतिक) कक्षा में पृथ्वी से 35,000 किलोमीटर ऊपर उपग्रह होते हैं।


अंतरिक्ष में मलबे के 13 करोड़ से अधिक टुकड़े हैं, जिनमें से केवल 35,000 टुकड़े (10 सेमी से अधिक) ऐसे हैं, जिन्हें नियमित रूप से जमीन से ट्रैक किया जा सकता है। यहीं पर अंतरिक्ष क्षेत्र संबंधी जागरूकता की आवश्यकता सामने आती है, जिसके तहत सक्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष के मलबे सहित पृथ्वी की कक्षा में मौजूद वस्तुओं का पता लगाने एवं उनकी निगरानी का काम किया जाता है। जमीन से पता लगाने के लिए हमें राडार या दूरबीन जैसे ऑप्टिकल सिस्टम की जरूरत होती है। राडार आसानी से पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित वस्तु का पता लगा सकते हैं, लेकिन ऊपरी कक्षा के लिए हमें ऑप्टिकल सेंसर की आवश्यकता होती है।

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