चुनाव तो कब के समाप्त हो गए हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार की चुनावी रणभूमि पर अभी तक दो शव पड़े हैं, जिनका अंतिम संस्कार करना बाकी है। एक शव है करिश्मा का और दूसरा है जाति आधारित राजनीति का। ये महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दे हैं, सो इनका अंतिम संस्कार करना हम राजनीतिक पंडितों का काम है। अभी तक हमने ऐसा इसलिए नहीं किया है, क्योंकि यह यकीन करना मुश्किल है कि उत्तर भारत की राजनीति के ये दो सबसे शक्तिशाली खंभे वास्तव में गिर गए हैं।
अगर ये खंभे गिरे न होते, तो उत्तर प्रदेश में महागठबंधन इतनी बुरी तरह पराजित न हुआ होता और न ही मायावती इस गठबंधन को तोड़ने की बात करतीं। ऐसे ही बिहार में लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल का इतना बुरा हाल हो चुका है कि वह लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाया। उनकी बेटी मीसा भारती भी हार गईं।