यूएलआई लाए जाने की कई वजह हैं। एक वजह तो यही है कि सरकार स्वरोजगार करने वालों, ग्रामीण युवाओं और छोटे उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है, क्योंकि बदलते आर्थिक परिदृश्य और रोजगार के घटते मौकों के बीच 'आत्मनिर्भरता' ही बेहतर समाधान है। दूसरी वजह छोटे कर्जदारों को शोषण से बचाना है। चीनी एप्स द्वारा छोटे-छोटे ऋण देकर वसूली के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किया जाता रहा है। यह समस्या सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा और मनी लॉन्डि्रंग से भी जुड़ी है, जिसने भारत में अब तक 100 से अधिक जानें ले ली हैं। लगभग 40 फीसदी घोटालों का कोई सुराग भी नहीं मिला। इन सब का कारण किसी एकीकृत कर्ज प्रणाली का न होना और औपचारिक संस्थाओं जैसे बैंकों की जटिल प्रक्रिया और नाना प्रकार के दस्तावेजों की अनिवार्यता है।
वर्ष 2024-25 बजट में इसीलिए वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों को आम नागरिकों की ऋण-पात्रता तय करने के लिए एक आतंरिक मूल्यांकन पद्धति विकसित करने का निर्देश दिया और मुद्रा लोन के मूल्य को दोगुना कर दिया। परंतु ऐसी स्थिति में बैंकों के पास कर्जदार की पूरी जानकारी न होने और ऋण डिफॉल्ट करने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। यूएलआई दरअसल इन्हीं सवालों का जवाब है, जो आगामी दौर में भारतीय आर्थिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
इसमें किसी व्यक्ति की वित्तीय और गैर-वित्तीय जानकारियां डिजिटलीकृत रूप में एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी। इनमें न सिर्फ बैंक खातों और कर्जों की जानकारी होगी, बल्कि भूमि से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड्स, सैटेलाइट द्वारा भूमि की इमेजिंग और सहकारी संस्थाओं (कृषि, दुग्ध, मत्स्य आदि) द्वारा दिए जाने वाले पैसों की भी सूचना होगी। किसान क्रेडिट कार्ड के प्रयोग से निरंतर कृषि उपकरणों, खाद, बीज आदि की खरीद संबंधित किसान की कृषि उत्पादकता और ऋण-पात्रता का परिचायक होगी।
ऐसी स्थिति में बैंक, एनबीएफसी, फिन-टेक कंपनियां आसानी से और तुरंत ग्राहक के लिए उपयुक्त कर्ज सीमा और दरों को निर्धारित कर सकते हैं। इससे छोटे और ग्रामीण उधारकर्ताओं, जिनके पास कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है, के लिए भी क्रेडिट मूल्यांकन का समय कम हो जाएगा। इसका अगला स्वाभाविक कदम ब्याज दरों में पारदर्शिता और कमी होना चाहिए। भूमिहीन या जोतदार किसान या पहली बार कर्ज लेने वाले संपत्ति विहीन लोग भी अब मुख्यधारा की वित्तीय संस्थाओं द्वारा कर्ज के हकदार बनेंगे।
यूएलआई की एक और विशेषता अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, जैसे ब्लॉक-चेन का इस्तेमाल है। इससे डाटा ट्रांसफर में सुरक्षा और गोपनीयता को बढ़ावा मिलेगा। कोई भी कंपनी ग्राहक का डाटा बिना उसकी अनुमति के नहीं देख पाएगी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के हेल्थ-रिकॉर्ड की ही तरह ग्राहक निर्धारित समय, जैसे एक सप्ताह के लिए अपनी सहमति देंगे, जिसे आवश्यकतानुसार रद्द भी किया जा सकता है।
यूएलआई का तकनीकी ढांचा सामान्य मापदंडों वाले एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) से भी सुसज्जित है, जो दो अलग-अलग सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म के बीच बड़ी आसानी से एक पुल बना सकता है इसके चलते हर बैंक या संस्थान को अलग-अलग जटिल तकनीक नहीं बनानी पड़ेगी, और एकीकृत रूप से डाटा साझा करना संभव हो सकेगा। साथ ही इसका इस्तेमाल कर स्टार्टअप यूएलआई पर नए प्रयोग और नवाचार कर उसे और भी ज्यादा उपयोगी बना पाएंगे, जिस प्रकार यूपीआई से पेटीएम, फोन-पे, भारत-पे आदि का पूरा फिन-टेक इकोसिस्टम विकसित हुआ।
यूएलआई आम उपभोक्ता के सीधे संपर्क में न होकर एक ऐसी आधारशिला रख सकता है, जो कर्ज मूल्यांकन, वितरण, भुगतान और वित्तीय डाटा ट्रांसफर को गोपनीय, सुदृढ़ और आधुनिक बनाएगा। हालांकि यह वक्त ही बताएगा कि यूपीआई की ही तरह यूएलआई लोकप्रिय होगा या नहीं।