फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतर्ध्वनि: शब्दों में अमानवीय व्यवस्थाओं को चुनौती देने की शक्ति है

Tue, 10 Sep 2019 03:37 AM IST
बेहरूज बूचानी बेहरूज बूचानी
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pexels
विज्ञापन

जब मैं क्रिसमस आइलैंड पहुंचा, तो मुझे एक आव्रजन अधिकारी ने बुलाकर कहा कि मुझे मानुस द्वीप पर भेजा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर के बीच स्थित है। मैंने उसे बताया कि मैं एक लेखक हूं। वह व्यक्ति मुझ पर हंसा। यह अपमानजनक था। जब मैं मानुस आया, तो मैंने अपनी एक और छवि गढ़ी।

विज्ञापन


मैंने एक सुदूर जेल में एक उपन्यासकार की कल्पना की। कभी-कभी मैं जेल की बाड़ के बगल में काम कर सकता था और कल्पना कर सकता था कि उपन्यासकार उस स्थान पर बंद है। यह छवि विस्मयकारी थी। वर्षों तक मैंने उस छवि को अपने जेहन में बनाए रखा। यहां तक कि जब मुझे खाना लेने के लिए लंबी कतारों में इंतजार करने के लिए मजबूर किया गया, या अन्य अपमानजनक क्षणों को सहन करना पड़ा।

इस छवि ने हमेशा अपनी गरिमा और एक इंसान के रूप में पहचान बनाए रखने में मेरी मदद की। वास्तव में मैंने इस छवि को व्यवस्था द्वारा बनाई गई छवि के विरोध में गढ़ा। उस व्यवस्था के खिलाफ वर्षों के संघर्ष के बाद, जिसने हमारी व्यक्तिगत पहचान को पूरी तरह से नजर अंदाज कर दिया, मुझे खुशी है कि हम सम्मानित होने के क्षण तक पहुंचे हैं। यह साबित करता है कि शब्दों में अब भी अमानवीय व्यवस्थाओं और संरचनाओं को चुनौती देने की शक्ति है।
विज्ञापन


मैंने हमेशा कहा है कि मैं शब्दों और साहित्य में विश्वास करता हूं। मेरा मानना है कि साहित्य में परिवर्तन और सत्ता की संरचनाओं को चुनौती देने की क्षमता है। साहित्य के पास हमें स्वतंत्रता देने की शक्ति है। मैं वर्षों से जेल में कैद रहा, लेकिन इस दौरान मेरा मस्तिष्क हमेशा शब्दों को रचता रहा और वे शब्द मुझे सीमाओं से पार ले गए, मुझे विदेशी धरती और अज्ञात स्थानों पर ले गए। मेरा मानना है कि शब्द इस जेल और इसकी बाड़ों से बेहद शक्तिशाली हैं।
विज्ञापन


(ईरानी-कुर्दिश लेखक, फिल्मकार, पत्रकार।)

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें