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अंतर्ध्वनि: एक व्यक्ति का जीवन हजारों क्षणों और दिनों का योग होता है

Tue, 27 Aug 2019 01:09 AM IST
जॉर्ज लुई बोर्खेज जॉर्ज लुई बोर्खेज
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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मैं अपने आपको अनिवार्यतः एक पाठक मानता हूं। ...मैंने जो पढ़ा है, वह मेरे लेखन से कहीं ज्यादा महत्व का है। आप वही पढ़ते हैं, जो आपको पसंद है, लेकिन आप ठीक वही नहीं लिख पाते, जो आप लिखना चाहते हैं। असल में आप उतना भर ही लिख पाते हैं, जितना आपसे लिखा जाता है। एक व्यक्ति का जीवन हजारों क्षणों और दिनों का योग होता है।

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इन मार-तमाम दिनों और इनमें घटित घटनाओं की महज एक क्षण में समाई हो सकती है। ऐन उस क्षण में, जब व्यक्ति यह जान लेता है कि वह कौन है और अपने को आमने-सामने देखने लगता है। एक महान किताब लिखने लिए, शायद एक ही मूल और सामान्य योग्यता की दरकार होती है।

 किताब के हर हिस्से में कुछ न कुछ ऐसा हो, जो हमारी कल्पना को एक सुखद एहसास से भर दे। मेरे लिए एक लेखक होने का क्या मतलब है? इसका मतलब अपनी कल्पनाओं के प्रति निष्कपट होना है।
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जब मैं कुछ लिख रहा होता हूं तब, मैं इसकी परवाह नहीं करता कि यह वस्तुतः कितना सच है। हमें चीजों को बदलना होगा। तब भी, जब हमें ऐसा करना अप्रासंगिक जान पड़े। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो हमें खुद को कलाकार नहीं, महज पत्रकार या इतिहासकार मानना चाहिए। जोकि मैं मानता हूं कि सच्चे इतिहासकारों ने भी यह जान लिया है कि वे एक उपन्यासकार की तरह कल्पनाशील हो सकते हैं। मैं अभिव्यक्ति में नहीं, सिर्फ संकेतों में विश्वास करता हूं। 

आखिरकार शब्द क्या हैं? शब्द साझा स्मृतियों के संकेत ही तो हैं। अगर मैं किसी शब्द का इस्तेमाल करता हूं, तो पढ़नेवाले को उस शब्द का कोई अर्थ पहले से पता होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है, तो उस शब्द का उसके लिए कोई मानी नहीं। मेरे ख्याल में हम लेखक पाठकों के मन में उस शब्द विशेष के अर्थ की स्मृति जगाकर उसे कल्पनाशील ही बनाते हैं।
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(अर्जेंटीना के चर्चित कवि-गद्यकार)

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