आज विश्व टेलीविजन दिवस है। टेलीविजन शब्द सुनते या देखते ही उस चौकोर डिब्बे की याद आ जाती है जिसकी स्क्रीन पर एक गोल से प्रतीक चिह्न के नीचे अंकित 'सत्यम् शिवम् सुदरम' नामक पंक्ति होती थी। यह पंक्ति और प्रतीक चिह्न राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन की याद दिलाते हैं।
ज्यादातार लोग न तो विश्व टेलीविजन दिवस के बारे में जानते हैं और न ही टेलीविजन की कहानी के बारे में। टेलीविजन ग्रीक प्रीफिक्स ‘टेले’ और लैटिन वर्ड ‘विजीओ’ से मिलकर बना शब्द है। टेलीविजन यानि टीवी एक वैज्ञानिक उपकरण है, जो जन-संचार का दृश्य-श्रव्य माध्यम है।
1927 में टेलीविजन का आविष्कार अमेरिका के वैज्ञानिक जॉन लॉगी बेयर्ड ने किया था। इसी टेलीविजन को पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप धारण करने के बाद जॉन लॉगी बेयर्ड 1938 में मार्केट में लेकर आ गए। भारत में हलांकि इसके पहुंचने में तीन दशक से ऊपर का समय लग गया।
आज तो हर घर में टेलीविजन है, लेकिन पहला टेलीविजन खरीदने का सौभाग्य कोलकाता के एक संपन्न नियोगी परिवार को मिला था। देश में सर्वप्रथम टेलीविजन का प्रयोग 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में दूरदर्शन केंद्र की स्थापना के साथ हुआ था, परंतु आमजन में इसका प्रसार 80 के दशक से माना जाता है। बदलती तकनीक व नए-नए अविष्कारों के चलते टेलीविजन में व्यापक परिवर्तन होते रहे।
भारत में इसका व्यापक प्रसार 1982 में आयोजित एशियाड खेलों के आयोजन से हुआ। लोगों को बुद्धिमान बनाने वाले इस बुद्धू बक्सा में दिखाई देने वाली बोलती तस्वीरें जो कभी ब्लैक एंड व्हाइट हुआ करती थी अब कलर में बदल गईंं। शुरू में इसका नाम टेलिविजन इंडिया था जो 1975 में बदलकर दूरदर्शन हो गया।
26 जनवरी 1993 को दूरदर्शन ने विस्तार करते हुए अपना दूसरा चैनल, "मेट्रो चैनल" के नाम से शुरू कर दिया बाद में पहला चैनल डीडी 1 और दूसरा डीडी 2 के नाम से लोकप्रिय हो गए। आज 30 से ऊपर राष्ट्रीय व क्षेत्रीय चैनल दूरदर्शन द्वारा देश भर में प्रसारित किए जा रहे हैं।
80-90 के दशक में रामायण व महाभारत जैसे धारावाहिकों ने टेलीविजन विस्तार में ऐसी क्रांति ला दी कि इनके प्रसारण के समय सड़कें तक सुनसान होने लग गई। राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल दूरदर्शन एक ऐसी पहचान बन चुका था कि जिसके घर में टेलीविजन और दूरदर्शन आता उसे ही कामयाबी व उन्नति का प्रतीक समझा जाने लगा था।
दिन- प्रतिदिन टेलीविजन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए 1996 में संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली 21 नवंबर को विश्व टेलीविज़न दिवस घोषित कर दिया। इसके बाद प्राइवेट चैनलों की एंट्री होना और इन्हें एक के बाद एक लाइसेंस मिलते गए। भारत में आज प्रसारित होने वाले टीवी चैनलों की संख्या लगभग 1000 के आसपास पहुंच चुकी है।
जैसे ही 21वीं सदी की शुरुआत से केबल टीवी की शुरुआत हुई वैसे ही भारत में सही तरीके से रंगीन टीवी का दौर शुरू हुआ। नित-नए आविष्कारों के साथ टेलीविजन में भी लगातार परिवर्तन होते गए। शुरू के भारी-भरकम डिब्बे के आकार से लेकर आज हल्के पतले एचडीटीवी भी स्मार्ट हो गए हैं।
टेलीविजन के आविष्कार नें इंफॉर्मेशन सेक्टर में एक क्रांति का आगाज किया इसके बाद वैश्विक स्तर पर टेलीविजन की इंपॉर्टेंस का जब लोगों को पता चला तब दूसरी क्रांति आई। वर्तमान में हमारा जो भी आर्थिक व सामाजिक विकास हुआ है उसके पीछे टेलीविजन की सकारात्मक भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।